ममता बनर्जी का बागी गुट पर तगड़ा एक्शन, फिरहाद हकीम और अरूप रॉय समेत 7 दिग्गज विधायकों को पार्टी से निकाला
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के इतिहास की सबसे कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए विद्रोह की राह पकड़ने वाले नेताओं पर कड़ा चाबुक चलाया है। बीते दिन ऋतब्रत बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक सीक्रेट मीटिंग में शामिल होने वाले पार्टी नेताओं को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया गया था। तृणमूल कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जवाब से असंतुष्ट होने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के बाद आज उन सभी बागी चेहरों को प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
निष्कासित नेताओं में कई पूर्व मंत्री और ममता के सबसे करीबी चेहरे शामिल
ममता बनर्जी द्वारा तृणमूल कांग्रेस से बाहर किए गए इन रसूखदार नेताओं की सूची ने सबको चौंका दिया है, क्योंकि इसमें वो नाम शामिल हैं जो कभी पार्टी की रीढ़ माने जाते थे। विधानसभा चुनावों में मिली अप्रत्याशित हार के बाद उभरी इस बगावत के चलते जिन 7 दिग्गज विधायकों को पार्टी से निकाला गया है, उनमें फिरहाद हकीम (विधायक एवं पूर्व मेयर), अरूप रॉय (वरिष्ठ विधायक), जावेद खान (विधायक), रथिन घोष (विधायक), सबीना यास्मीन (विधायक), अरूप बिस्वास (विधायक) और बिप्लब मित्रा (विधायक) शामिल हैं।
चुनावी शिकस्त के बाद सुलग रही थी बगावत की आग
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद से ही संगठन के भीतर असंतोष का लावा उबल रहा था। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर पहले कई विधायकों और सांसदों ने खुलेआम बगावती सुर अख्तियार किए। इसके बाद अंदरूनी कलह तब और खुलकर सामने आ गई, जब कोलकाता नगर निगम (KMC) के लगभग 70 पार्षदों के भी ऋतब्रत बनर्जी के साथ गोपनीय बैठक करने की खबरें सार्वजनिक हुईं। लगातार बढ़ते इस आंतरिक विद्रोह को कुचलने के लिए आखिरकार पार्टी हाईकमान को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
जांच और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी की इस समानांतर बैठक में शिरकत करने वाले पार्षद केवल कोलकाता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राज्य के तीन अलग-अलग जिलों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से अकेले 50 से अधिक पार्षद कोलकाता नगर निगम के बताए जा रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का टूटकर बागी गुट के पाले में जाना यह साफ संकेत देता है कि स्थानीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांगठनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है और असंतोष की जड़ें बेहद गहरी हैं।
ममता के सबसे वफादार सिपहसालार ने भी बदला पाला
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला नाम फिरहाद हकीम का है। कुछ दिनों पहले ही फिरहाद हकीम को राज्य विधानसभा परिसर के भीतर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ एक बंद कमरे में लंबी गुप्त बैठक करते हुए देखा गया था। फिरहाद हकीम को राजनीति में ममता बनर्जी का सबसे भरोसेमंद, वफादार और संकटमोचक सहयोगी माना जाता रहा है। ऐसे संकट के समय में उनके द्वारा बागी गुट का दामन थामना और इस सीक्रेट मीटिंग का हिस्सा बनना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
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