NCERT की किताब में मनुस्मृति का श्लोक शामिल, जानें महिलाओं के सम्मान पर क्या है संदेश

Manusmriti Shloka NCERT Class 9 Book: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में भारतीय इतिहास के कई अहम पहलुओं को शामिल किया है। इसमें वैदिक काल, महिलाओं की स्थिति और सामाजिक संरचना को सरल तरीके से समझाया गया है, ताकि छात्र इतिहास को बेहतर ढंग से समझ सकें।

वैदिक काल में महिलाओं का सम्मान और योगदान

किताब के अध्याय “1000 ईस्वी तक राज्य और समाज” में बताया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं को समाज में उच्च और सम्मानजनक स्थान प्राप्त था। उस समय महिलाएं शिक्षा में भाग लेती थीं, धार्मिक अनुष्ठानों में पुरुषों के साथ शामिल होती थीं और सार्वजनिक सभाओं में भी सक्रिय रहती थीं। ऋग्वेद के कई भजनों की रचना अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा जैसी महिला ऋषियों ने की थी।

इसी संदर्भ में मनुस्मृति के एक श्लोक (3.56) का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जहां स्त्रियों का सम्मान होता है वहां समृद्धि होती है और जहां उनका सम्मान नहीं होता वहां कार्य निष्फल हो जाते हैं। हालांकि किताब यह भी स्पष्ट करती है कि समय के साथ महिलाओं की स्थिति में उतार-चढ़ाव आया, लेकिन वे हमेशा घर, कृषि, शिल्प और धार्मिक कार्यों में योगदान देती रहीं।

सामाजिक ढांचे में बदलाव और वर्ण-जाति की समझ

किताब में बताया गया है कि प्रारंभिक वैदिक समाज में पहचान जन्म से नहीं बल्कि कई कारकों जैसे व्यवसाय, भाषा और क्षेत्र पर आधारित थी। ऋग्वेद का उदाहरण दिया गया है जिसमें एक ही परिवार में अलग-अलग पेशे दिखाए गए हैं।

चार वर्ण मूल रूप से कार्य आधारित थे और ज्ञान को सबसे ऊपर माना जाता था। बौद्ध ग्रंथ “सुत्त निपात” का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जन्म से अछूत नहीं होता, बल्कि कर्मों से उसकी पहचान बनती है।

जाति व्यवस्था का विकास और ऐतिहासिक उदाहरण

किताब के अनुसार, समय के साथ अलग-अलग समुदायों और व्यवसायों के कारण जाति व्यवस्था विकसित हुई। बाद के काल में गुप्त-वाकाटक युग की रानियों जैसे प्रभावती गुप्त का भी उल्लेख मिलता है, जिन्होंने शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निष्कर्ष में कहा गया है कि वर्ण और जाति हमेशा कठोर नहीं थे, बल्कि समय के साथ बदलते रहे।

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