अपराध मुक्त होने की राह पर उत्तर प्रदेश, महिला हिंसा और दहेज हत्या के मामलों में भारी गिरावट

Lucknow News: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की ताजा रिपोर्ट उत्तर प्रदेश को रहात देने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अपराध का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के विरुद्ध होने वाले अपराधों में प्रभावी कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि उत्तर प्रदेश अब ‘अपराध मुक्त प्रदेश’ बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में भी उत्तर प्रदेश में एक भी सांप्रदायिक दंगा दर्ज नहीं हुआ। हालांकि, प्रदेश में कानून-व्यवस्था से जुड़े बवाल के कुल 2,610 मामले जरूर सामने आए हैं। सांप्रदायिक दंगों का शून्य रहना प्रदेश सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

दहेज हत्या में 50% से अधिक का सुधार

महिला अपराधों के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश में बड़ा सुधार देखने को मिला है। सबसे चौंकाने वाले और सकारात्मक आंकड़े दहेज हत्या (Dowry Death) के मामलों में आए हैं।

साल 2023: 2,122 मुकदमे।

साल 2024: 1,047 मुकदमे।

दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराधों में सीधे तौर पर 50% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जो महिला सुरक्षा के प्रति शासन-प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है।

साइबर क्राइम में लखनऊ नंबर-1, देश में 5वें स्थान पर

जहां एक तरफ पारंपरिक अपराध घट रहे हैं, वहीं साइबर क्राइम एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। साइबर अपराध के मामले में लखनऊ उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि देश के मेट्रो शहरों की सूची में यह 5वें नंबर पर आता है।

यूपी की स्थिति: गाजियाबाद दूसरे और कानपुर तीसरे स्थान पर है।

विवेचना की सुस्त रफ्तार: लखनऊ में साइबर केसों की जांच की गति धीमी है। वर्तमान में 2,190 मामले लंबित हैं, जिनमें से 898 केस पिछले सालों के पुराने हैं।

देशभर के मेट्रो शहरों में साइबर क्राइम की स्थिति

रैंक शहर कुल मामले (2024)
1 बेंगलुरू 17,561
2 हैदराबाद 4,009
3 चेन्नई 1,882
4 पुणे 1,504
5 लखनऊ 952 (ऑनलाइन फ्रॉड)

ऑनलाइन फ्रॉड और यौन शोषण

ऑनलाइन फ्रॉड: लखनऊ इस मामले में प्रदेश में पहले पायदान पर है, यहाँ साल 2024 में कुल 952 मामले दर्ज किए गए।

ऑनलाइन यौन शोषण: इस श्रेणी में कानपुर प्रदेश में नंबर-1 पर है। तुलनात्मक रूप से लखनऊ में 10 मामले और गाजियाबाद में शून्य मामले दर्ज हुए हैं।

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