UP Politics: फुले जयंती पर मायावती का सियासी वार, सपा के PDA को बताया ‘अति-दुखद चेहरा’

Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ‘नामकरण’ और ‘सम्मान’ की सियासत गरमा गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने फुले को नमन करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को महज एक ‘छलावा’ और ‘अति-दुखद चाल’ करार दिया है।

फुले और सावित्रीबाई के योगदान को किया नमन

मायावती ने अपने संदेश में महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले के योगदान को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा समाज में शिक्षा के अभाव ने ही लोगों को गुलामी की बेड़ियों में धकेला। फुले दंपत्ति ने स्त्री शिक्षा और दलित उत्थान के लिए जो संघर्ष किया, उसी से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भी प्रेरणा मिली। बाबा साहेब खुद महात्मा फुले को अपना गुरु मानते थे।

नामकरण की राजनीति: सपा पर सीधा प्रहार

मायावती ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर ‘जातिवादी सोच’ का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा ने दलित और ओबीसी महापुरुषों के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने बसपा सरकार के उन फैसलों को गिनाया जिन्हें सपा ने बदल दिया था।

ज्योतिबा फुले नगर: अमरोहा का नाम बदलकर ज्योतिबा फुले के सम्मान में रखा गया था।

अन्य जिले: कांशीराम नगर, रमाबाई नगर, भीमनगर, प्रबुद्ध नगर और पंचशील नगर जैसे नाम बसपा सरकार की देन थे।

सपा का रुख: मायावती ने आरोप लगाया कि सपा ने जिले तो रखे, लेकिन महापुरुषों के सम्मान से जुड़े उन नामों को बदलकर अपनी संकीर्ण राजनीति का परिचय दिया।

“यही है PDA का असली चेहरा”

सपा के मौजूदा ‘PDA’ फॉर्मूले पर तंज कसते हुए मायावती ने कहा कि जो पार्टी सत्ता में रहते हुए दलित-पिछड़ा महापुरुषों का नाम बर्दाश्त नहीं कर सकी, वह आज किस मुंह से उनके हक की बात कर रही है? उन्होंने इसे सपा का ‘अति-दुखद चाल, चरित्र और चेहरा’ बताया।

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