बंगाल विधानसभा की बीए कमेटी में ममता-अभिषेक गुट के विधायकों को नहीं मिली जगह
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर चल रही सियासी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के वफादार गुट को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। विधानसभा की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण वैधानिक समितियों में से एक बिजनेस एडवाइजरी (BA) कमेटी का पुनर्गठन किया गया है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस नई समिति में ममता-अभिषेक गुट के किसी भी विधायक को जगह नहीं मिली है।
यह समिति इसलिए बेहद खास मानी जाती है क्योंकि यह विधानसभा सत्र की अवधि, कार्यसूची, पेश होने वाले विधेयकों और चर्चा के समय जैसे सबसे अहम फैसले लेती है। सीधे शब्दों में कहें तो सदन की पूरी कार्यवाही का खाका यही समिति तय करती है। सूची के अनुसार, इस 19 सदस्यीय स्थायी समिति में 14 सदस्य सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हैं, जबकि विपक्ष के खाते में आई 5 सीटें तृणमूल कांग्रेस के उस बागी लेकिन बहुमत वाले गुट को मिली हैं, जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अंदरूनी तौर पर तृणमूल कांग्रेस दो धड़ों में बंट चुकी है, लेकिन विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों ही गुटों के विधायक अभी भी तकनीकी रूप से तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में ही दर्ज हैं। यही वजह है कि नियमों और तकनीकी आधार पर इस नई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के गठन और इसके सदस्यों के चयन को कानूनी चुनौती देना फिलहाल आसान नहीं होगा।
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