Muzaffarnagar: टॉर्चर से मजदूर की मौत, फिर बोरे में भरकर फेंकी लाश, SIT गठित

Muzaffarnagar Crime News: मुजफ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र से सामने आए बंधुआ मजदूरी कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में मजदूरों के साथ कथित तौर पर हुई हैवानियत की परतें खुलती जा रही हैं। अब जांच में खुलासा हुआ है कि फैक्ट्री में कैद एक मजदूर की यातनाएं सहते-सहते मौत हो गई थी, जिसके बाद आरोपियों ने शव को बोरे में भरकर ठिकाने लगा दिया।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस ने फरार फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में नया मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी कर दिया गया है।

टॉर्चर ने ले ली जान, शव को बोरे में भरकर लगाया ठिकाने

एसएसपी संजय कुमार के मुताबिक मृत मजदूर की पहचान अर्जुन के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि नवंबर 2025 में फैक्ट्री परिसर के भीतर लगातार दी जा रही प्रताड़ना और मारपीट के कारण उसकी मौत हो गई थी। आरोप है कि मौत के बाद कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए शव को एक बड़े बैग में पैक कर कहीं फेंक दिया गया।

पुलिस ने इस मामले में सुपरवाइजर शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अब भी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस की दो विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

छापेमारी में खुली ‘कैदखाने’ जैसी फैक्ट्री की पोल

पूरा मामला 22 जून को सामने आया था, जब प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारकर 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था। इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे। मजदूरों के शरीर पर चोटों के निशान और प्रताड़ना के सबूत मिलने के बाद जांच तेज की गई।

मजदूरों ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में बताया कि उन्हें अलग-अलग राज्यों से 12 हजार रुपये महीने की नौकरी का लालच देकर लाया गया था, लेकिन महीनों तक वेतन नहीं दिया गया। उन्हें फैक्ट्री के अंदर ही बंधक बनाकर रखा जाता था और बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।

कोड़ों से पिटाई, भालों से हमला और कुत्तों से कटवाने का आरोप

पीड़ित मजदूरों की आपबीती ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। उनके मुताबिक काम छोड़ने या भागने की कोशिश करने पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। आरोप है कि मजदूरों को कोड़ों से मारा जाता, भालों से गोदा जाता और डराने के लिए कुत्तों से कटवाया जाता था।

इतना ही नहीं, सजा के तौर पर कई बार उन्हें खाना तक नहीं दिया जाता था और जानवरों का चारा खाने के लिए मजबूर किया जाता था।

पीड़ितों के पुनर्वास में जुटा प्रशासन

मुक्त कराए गए सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनका इलाज जारी है। श्रम विभाग और जिला प्रशासन पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया में जुट गया है। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक मुक्त मजदूर को सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी।

वहीं पुलिस ने संकेत दिए हैं कि फरार आरोपी अंकित बालियान की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी जल्द शुरू की जा सकती है।

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