Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से अब तक 160 मौतें, 750 लापता, UP-बिहार तक हाई अलर्ट
Nepal Flood: नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या भारतीयों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों (Kailash Mansarovar Pilgrims) की भी है।
तिमुरे और आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से फैला कि कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) में अचानक आई बाढ़ के बाद तबाही का दायरा लगातार बढ़ता गया और कई जिलों तक इसका असर पहुंचा।
133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता
बताया जा रहा है कि करीब 400 लोग लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय पर्यटक (Indian Tourists) और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते गए थे। अधिकारियों की ओर से लगातार लापता लोगों की तलाश और उनकी जानकारी जुटाने का काम किया जा रहा है।
भारत सरकार ने भी स्थिति पर नजर बना रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर हादसे पर संवेदना जताई और हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया है।
भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने की तैयारी की जा रही है। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के विमानों के जरिए जरूरी राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा रही है, जबकि NDRF की टीमें भी राहत और बचाव अभियान के लिए तैयार रखी गई हैं।
UP में 1070 हेल्पलाइन, भारतीयों के लिए मदद का इंतजाम

Nepal में फंसे उत्तर प्रदेश के लोगों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने 1070 हेल्पलाइन (UP Helpline 1070) सक्रिय की है। वहीं भारतीय दूतावास की ओर से भी प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन जारी की गई हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने भी नेपाल में मौजूद पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है। भारत की एजेंसियां नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं।
भूकंप के कुछ मिनट बाद आई विनाशकारी बाढ़
Nepal के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। शुरुआती आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर या पहाड़ी क्षेत्र में हलचल हुई होगी, जिससे अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे आया।
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, बाढ़ से कुछ मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। वहीं, शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आने के संकेत मिले हैं।
बाढ़ का पानी और मलबा तिमुरे से आगे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के रास्ते कई इलाकों तक पहुंचा। रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी समेत कई जिलों में इसका असर देखा गया है।
इस प्राकृतिक आपदा ने 2013 की केदारनाथ त्रासदी (Kedarnath Disaster) की यादें ताजा कर दी हैं। नेपाल की तबाही का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने की आशंका है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
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