Iran US डील में पाकिस्तान को नहीं मिली अहमियत, फिर भी जीत का दावा क्यों कर रहे हैं शहबाज?

Iran US Peace Deal: ईरान और अमेरिका के बीच हुए कथित अंतरिम शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान में नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह इस प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाएगा, लेकिन अंतिम घटनाक्रम ने इस्लामाबाद की उम्मीदों को झटका दिया। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी7 बैठक के दौरान पेरिस में समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि पाकिस्तान को इसकी औपचारिक प्रक्रिया से दूर रखा गया।

संसद में शहबाज ने गिनाईं कूटनीतिक उपलब्धियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर इस समझौते को अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करना चाहते थे। हालांकि, बाद में हालात बदल गए और पाकिस्तान को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। इसके बाद शहबाज शरीफ ने संसद में भाषण देते हुए दावा किया कि ईरान-अमेरिका मध्यस्थता के कारण पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि कई बड़े देशों के मुकाबले पाकिस्तान का नाम अधिक सम्मान के साथ लिया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम को भारत की विदेश नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पहले भारत की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद चर्चा का रुख बदल गया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि समझौते की प्रक्रिया में कतर ने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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