प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट, लखनऊ में गोमती नदी का पानी हाथ धोने के लायक भी नहीं
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Lucknow News: गोमती नदी को साफ और निर्मल बनाने के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गोमती का पानी अब पीने योग्य तो दूर, कई स्थानों पर हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि नदी में मल प्रदूषण (Total Coliform) निर्धारित मानक से करीब 26 गुना अधिक दर्ज किया गया है, जो सीधे तौर पर सीवर और गंदे नालों के पानी के नदी में मिलने का संकेत देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, गोमती का उद्गम क्षेत्र सीतापुर में पानी की गुणवत्ता अभी भी अच्छी स्थिति में है। यहां घुलित ऑक्सीजन (DO) और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) मानकों के भीतर हैं। लेकिन लखनऊ पहुंचते-पहुंचते नदी की हालत तेजी से बिगड़ जाती है।
वर्ष 2015 की तुलना में स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। उल्टा मल प्रदूषण और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदी में लगातार गिरते ऑक्सीजन स्तर और बढ़ते प्रदूषण के कारण जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। हालांकि जांच के लिए सैंपलिंग प्वाइंट तीन से बढ़ाकर आठ कर दिए गए हैं, लेकिन नालों का गंदा पानी रोकने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई अभी भी नहीं हो सकी है। यही वजह है कि ‘निर्मल गोमती’ का सपना फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है।
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