28 साल पुराने मारपीट मामले में राज बब्बर को बड़ी राहत, कोर्ट ने रद्द की 2 साल की सजा

Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के अंतर्गत आने वाली विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस नेता राज बब्बर को एक बड़ी कानूनी जीत दिलाई है। अदालत ने 1996 के चुनाव के दौरान मतदान अधिकारी से मारपीट के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 2 साल की कैद के फैसले को पलटते हुए उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।

मामले का संक्षिप्त इतिहास

घटना की तारीख: 02 मई 1996 (लोकसभा चुनाव के दौरान)।

स्थान: मतदान केंद्र संख्या 192, थाना वजीरगंज, लखनऊ।

शिकायतकर्ता: मतदान अधिकारी कृष्ण सिंह राणा।

समाजवादी पार्टी के तत्कालीन प्रत्याशी राज बब्बर और उनके साथियों पर फर्जी मतदान का आरोप लगाकर मतदान अधिकारियों (कृष्ण सिंह राणा और शिव कुमार सिंह) के साथ मारपीट करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप था।

निचली अदालत का पिछला फैसला (जुलाई 2022)

7 जुलाई 2022 को विशेष एसीजेएम अंबरीश श्रीवास्तव की कोर्ट ने राज बब्बर को दोषी करार देते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई थी।

धारा 332 (सरकारी सेवक को चोट पहुंचाना): 2 साल की कैद और ₹4000 जुर्माना।

धारा 353 (सरकारी काम में बाधा): 1 साल की कैद और ₹1000 जुर्माना।

अन्य धाराएं (143, 323): 6-6 महीने की कैद और जुर्माना।

कुल जुर्माना: ₹6500।

सेशन कोर्ट (MP-MLA कोर्ट) का ताजा निर्णय

विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण ने राज बब्बर की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली दलीलों को स्वीकार किया।

कोर्ट ने पाया कि राज बब्बर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं थे। अदालत ने 2 साल की कैद और जुर्माने के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया। मामले के दूसरे आरोपी अरविंद यादव की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, जिसके कारण उनके खिलाफ मामला पहले ही बंद कर दिया गया था।

इस फैसले के साथ ही राज बब्बर के ऊपर मंडरा रहा जेल जाने और चुनावी अयोग्यता का खतरा टल गया है। फैसले के समय राज बब्बर स्वयं न्यायालय में उपस्थित रहे और उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया।

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