शैलेश लोढ़ा ने अभिजीत दीपके और राहुल गांधी पर कसा तंज, कविता से बच्चों को भी दिया संदेश
Shailesh Lodha: उदयपुर नगर निगम के दीपावली मेले में आयोजित कवि सम्मेलन में शैलेश लोढ़ा ने अपने व्यंग्य से लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने राजनीतिक कटाक्ष के साथ बच्चों को बचपन जीने देने और परिवार को समय देने की अपील भी की।
‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में तारक मेहता का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुए अभिनेता और कवि शैलेश लोढ़ा एक बार फिर अपने व्यंग्य को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने उदयपुर में आयोजित एक कवि सम्मेलन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसा।
दरअसल, मंगलवार रात उदयपुर नगर निगम की ओर से दीपावली मेले का आयोजन किया गया था। इसके तहत हुए कवि सम्मेलन में कई जाने-माने कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं। शैलेश लोढ़ा ने अपनी कविताओं और राजनीतिक व्यंग्य से दर्शकों का ध्यान खींचा।
अभिजीत दीपके पर 450 लोगों की भीड़ को लेकर कसा तंज
कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें शैलेश लोढ़ा अभिजीत दीपके पर निशाना साधते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “गलतफहमी में मत रहो कि तुम बहुत अच्छा कर रहे हो, जैसे अभिजीत दीपके गलतफहमी में है। जंतर-मंतर पर 450 लोग जमा करके सोचता है कि मैं बहुत बड़ा हो गया? उसे एक बार यहां लेकर आओ और बताओ भीड़ क्या होती है, तब पता चलेगा।”
राहुल गांधी की ‘नकली पार्लियामेंट’ पर भी की टिप्पणी
शैलेश लोढ़ा ने अपने व्यंग्य में राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कमाल करते हो यार। क्या चल रहा है इस देश के अंदर? लेकिन वो आदमी देखा, बेचारा भला आदमी। नकली पार्लियामेंट बनाई। बहुत मेहनत की। उसमें भी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया। ये ओवर कॉन्फिडेंस है। कॉन्फिडेंस और ओवर कॉन्फिडेंस में फर्क होता है। सफेद कुर्ता-पैजामा और जैकेट पहनने से…।”
उनकी इस टिप्पणी में राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए राजनीतिक कटाक्ष किया गया। कार्यक्रम में शैलेश लोढ़ा ने अपने अंदाज में नेताओं के बयानों और राजनीतिक गतिविधियों पर व्यंग्य किया।
बच्चों को बचपन जीने देने और परिवार के साथ समय बिताने की अपील
राजनीतिक व्यंग्य के अलावा शैलेश लोढ़ा ने अपनी कविता के जरिए बच्चों को भी खास संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मैं बच्चे ढूंढ रहा हूं, जो बच्चे हों… इन बच्चों को सिर्फ बच्चे रहने दो।”
उन्होंने कहा कि बच्चों पर छोटी उम्र में ही बड़ों जैसी जिम्मेदारियों और उम्मीदों का बोझ नहीं डालना चाहिए। उन्हें खेलने-कूदने और बेफिक्र होकर अपना बचपन जीने का पूरा मौका मिलना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने लोगों से मोबाइल फोन में व्यस्त रहने के बजाय परिवार के साथ बैठने और उन्हें समय देने की अपील की। उनका संदेश था कि परिवार के साथ बातचीत और साथ बिताया गया समय भी उतना ही जरूरी है।

