Ram Mandir मामले पर सपा-कांग्रेस हमलावर, लेकिन मायावती की BSP ने क्यों ओढ़ी चुप्पी?

Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने में जुटी हैं, वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) और पार्टी प्रमुख मायावती का रुख अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहा है।

हाल ही में मायावती ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चोरी की आलोचना तो की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ram Mandir को मुद्दा क्यों नहीं बना रही BSP?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा की राजनीति का आधार हमेशा से सामाजिक समीकरण रहा है, न कि धार्मिक ध्रुवीकरण। पार्टी का मानना है कि यदि यह मुद्दा पूरी तरह धार्मिक रंग लेता है, तो चुनावी मुकाबला भाजपा और सपा के बीच सिमट सकता है, जिसका नुकसान बसपा को उठाना पड़ सकता है।

इसी वजह से मायावती इस विवाद (Ram Mandir Donation Case) को चुनावी मुद्दा बनाने से बचती दिखाई दे रही हैं।

वोट बैंक की रणनीति पर फोकस

विश्लेषकों के अनुसार, मायावती की कोशिश बहुजन वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ ब्राह्मण, सवर्ण और मुस्लिम मतदाताओं में भी अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने की है।

ऐसे में पार्टी नहीं चाहती कि Ram Mandir जैसे धार्मिक विवाद में खुलकर उतरने से उसका सामाजिक समीकरण प्रभावित हो। यही वजह है कि बसपा इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाती नजर आ रही है।

फिलहाल जहां विपक्ष की अन्य पार्टियां इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हैं, वहीं बसपा की रणनीति इस विवाद से दूरी बनाकर अपने पारंपरिक वोट बैंक पर फोकस बनाए रखने की दिखाई दे रही है।

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