जाति जनगणना रोकने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, CJI ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार
Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने देश में होने वाली जाति आधारित जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को शुक्रवार को सिरे से खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत न केवल याचिका की मांग, बल्कि उसमें इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर भी बेहद नाराज दिखी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए उसकी गरिमा पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से पेश हुआ, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत अपनी नाराजगी छिपा नहीं सके। याचिका की भाषा पढ़कर उन्होंने सख्त लहजे में कहा, आपने अपनी याचिका में बेहद अमर्यादित और बदतमीजी वाली भाषा का इस्तेमाल किया है। आपने यह याचिका किससे लिखवाई है? एक कानून के जानकार और बार के सदस्य होने के नाते आपसे उम्मीद की जाती है कि आप मुद्दों को गंभीरता से पहचानें, न कि इस तरह की भाषा का प्रयोग करें।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी मुद्दे पर कोर्ट आने से पहले याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए और उन्हें जागरूक करने की कोशिश करनी चाहिए।
क्या थी याचिका में मांग
इस जनहित याचिका में मुख्य रूप से दो मांगें की गई थीं।
केंद्र सरकार को आगामी जाति आधारित जनगणना रोकने का निर्देश दिया जाए।
उन परिवारों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन वाली नीतियां बनाई जाएं, जिनकी एकल संतान (Single Child) है। अदालत ने इन दोनों ही मांगों को सुनने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि साल 2027 में होने वाली देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी।
जाति का आंकड़ा: 1931 के बाद यह पहली ऐसी जनगणना होगी जिसमें जाति के आधार पर व्यापक गणना की जाएगी।
पूरी तरह डिजिटल: यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा जुटाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

