सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर लगाई रोक, असम पुलिस की गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा
Sandesh Wahak Digital Desk: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत नहीं मिल सकी है। शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। अब खेड़ा के पास असम की स्थानीय अदालत में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें गिरफ्तारी से फिलहाल कोई संरक्षण (Protection) प्राप्त नहीं है।
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर तरीके से पक्ष रखा। उनकी प्रमुख दलीलें निम्नलिखित थीं।
अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: तुषार मेहता ने सवाल उठाया कि जब घटना असम में हुई और FIR भी गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में दर्ज है, तो तेलंगाना हाई कोर्ट ने जमानत क्यों दी?
फोरम शॉपिंग: उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। उन्होंने तर्क दिया कि केवल संपत्ति या आधार कार्ड के पते के आधार पर किसी भी राज्य के हाई कोर्ट से राहत मांगना गलत है।
गंभीर आरोप: सरकार ने तर्क दिया कि खेड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उन्हें असम की संबंधित अदालत में ही अपनी बात रखनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया। पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से फिलहाल कोई सुरक्षा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि खेड़ा असम की संबंधित अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का उस अर्जी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह पूरा कानूनी विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनकी भुइयां से जुड़ा है। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि रिनकी भुइयां के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनके पास विदेशों में अवैध संपत्ति है। सीएम हिमंता ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए इसे असम की जनता का अपमान बताया। इसके बाद रिनकी भुइयां ने खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया।
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