Corruption: व्यापमं घोटाले में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को बख्शा!

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद एमपी के सबसे बड़े घोटाले की पुन: शुरू हो सकती है जांच, चंद दिनों पहले मिला है नोटिस

Sandesh Wahak Digital Desk: व्यापमं एक बेहद मायावी किस्म का हजारों करोड़ का घोटाला है। कहने को जिसकी जांच थी तो सीबीआई के पास, लेकिन सियासी दबाव कहें या रसूखदार आरोपियों की किस्मत, उन पर शिकंजा आज तक नहीं कसा गया।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने लचर जांच के आरोपों पर एमपी के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में सरकार-सीबीआई से जवाब मांगा है। घोटाले की जांच पुन: शुरू होने के प्रबल आसार हैं। घोटाला भले एमपी का है, असली खिलाड़ी सॉल्वर बनकर यूपी के मेडिकल कॉलेजों से गए थे। एक दशक पहले सीबीआई ने छापेमारी तो की, बस निजी मेडिकल कॉलेजों को बख्श दिया।

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केजीएमयू के छात्र भी थे इस खेल का हिस्सा

घोटाले से जुड़े यूपी के तमाम आरोपी फिलहाल लम्बे समय से फरार हैं। यूपी के कई मेडिकल कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की संलिप्तता सामने आने के बावजूद कार्रवाई एक इंच नहीं हुई। कानपुर के जीएसवीएम और आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज का नाम घोटाले में प्रमुख रूप से आया था। कानपुर के कॉलेज के करीब 52 छात्रों के नाम सामने आने के बाद कईओं को गिरफ्तार किया गया। लखनऊ के केजीएमयू के छात्र भी इस खेल का हिस्सा थे।

जांच में यह बात सामने आई कि कानपुर के कई मेडिकल कोचिंग संचालकों ने भी छात्रों को अधिक पैसे का लालच देकर सॉल्वर बनने के लिए तैयार किया था। ये सॉल्वर मध्य प्रदेश जाकर वास्तविक उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देते थे। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में 34 आरोपियों पर इनाम घोषित हुआ था। सॉल्वर सिंडिकेट मेडिकल कॉलेज में पढऩे वाले मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को पैसों का लालच देकर उसे अपने साथ जोडऩे का काम करता था। लेकिन सीबीआई की जांच यूपी के सिर्फ दो से तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक सिमट गयी।

 कानपुर के 26 पूर्व मेडिकल छात्र बने आरोपी
व्यापमं घोटाले में तीन वर्ष पहले सीबीआई ने फ़ाइल को पुन: खोलते हुए कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के 26 पूर्व मेडिकल छात्रों को आरोपी बनाया था। सबसे पहले डॉ. कुलदीप का रिकॉर्ड तलब किया। जिसकी लोकेशन आजतक नहीं मालूम हुई। एमपी एसआईटी की जांच को आधार बनाकर 76 पूर्व मेडिकल छात्रों की पहचान करते हुए अभी 26 को आरोपित बनाया था। वर्ष 2006, 2009, 2011 और 2013 के छात्र आरोपों की जद में हैं।
क्या था व्यापमं घोटाला
व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) एमपी में उन पदों की भर्तियां करता है, जिनकी भर्तियां म.प्र. लोक सेवा आयोग नहीं करता। इसके तहत प्री मेडिकल, प्री इंजीनियरिंग और कई सरकारी नौकरियों की परीक्षा होती  है। घोटाला तब सामने आया जब संविदा टीचर्स, ट्रैफिक पुलिस, सब इंस्पेक्टरों की भर्ती परीक्षा के अलावा मेडिकल एग्जाम में ऐसे लोगों को पास किया गया जिनके पास योग्यता नहीं थी।
घोटाले में हुई थीं 50 से ज्यादा मौतें, पूर्व राज्यपाल राम नरेश यादव के बेटे भी लखनऊ में मिले थे मृत
घोटाले में 50 से ज्यादा लोगों की मौत के संगीन आरोप हैं। सफेदपोशों और अफसरों के दबाव में सीबीआई ने हल्की जांच की। एमपी के पूर्व दिवंगत राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव तक 25 मार्च 2015 को लखनऊ स्थित आवास में मृत मिले थे। घोटाले में सवाल रामनरेश पर तत्समय उठे थे। एक दशक पहले लखनऊ में रामनरेश यादव के ओएसडी रहे धनराज व इलाहाबाद में पूर्व ओएसडी ओमप्रकाश के ठिकानों से सीबीआई छापे में कई दस्तावेज मिले थे। सैफई से भी सात फर्जी अभ्यर्थी सॉल्वर बने थे। एप्लिकेशन फॉर्म में कॉमन ईमेल आईडी लिखी थी। फिर मामले ने सियासी तूल पकड़ा।

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