मोदी सरकार की नई योजना पर भड़के थलापति विजय, PM को लिखी चिट्ठी
Tamil Nadu CM: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार की नई ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ योजना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी चिंता जताई है। यह कानून 1 जुलाई से पूरे देश में लागू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था से तमिलनाडु पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
पत्र में विजय ने आरोप लगाया कि यदि योजना के मौजूदा प्रावधानों में जल्द बदलाव नहीं किया गया तो ग्रामीण रोजगार योजनाएं प्रभावित होंगी और राज्य को अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती करनी पड़ सकती है।
फंड शेयरिंग मॉडल पर सवाल
मुख्यमंत्री ने केंद्र के नए 60:40 फंड शेयरिंग मॉडल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से मनरेगा अलग व्यवस्था के तहत संचालित हो रही थी और अचानक किए गए बदलाव से राज्यों के वित्त पर दबाव बढ़ेगा। विजय ने मांग की कि पहले की तरह मजदूरी का 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करे, जबकि निर्माण सामग्री का खर्च 75:25 के अनुपात में केंद्र और राज्य के बीच साझा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में तैयार किया गया यह फॉर्मूला राज्यों की स्थानीय जरूरतों को पूरी तरह नहीं समझता।
सरकार ने क्या कहा
केंद्र सरकार के अनुसार नई योजना के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की जगह 125 दिनों के रोजगार का कानूनी अधिकार मिलेगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणाम आधारित बनाना है।
सरकार ने मजदूरी दरों में भी बदलाव किया है। अब किसी भी कार्य के लिए 300 रुपये से कम दैनिक मजदूरी नहीं मिलेगी। राष्ट्रीय औसत अधिसूचित मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना को ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की जगह 125 दिनों के रोजगार का कानूनी अधिकार मिलेगा।” उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर काम से वंचित न रहे।
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