Toxic Review: यश का दमदार स्वैग, कियारा की शानदार मौजूदगी, लेकिन कमजोर कहानी ने किया निराश
Bollywood News: लंबे इंतजार के बाद यश की मच अवेटेड फिल्म ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है।
फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है और इसमें यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में हैं।
करीब 3 घंटे 15 मिनट लंबी यह फिल्म गैंगस्टर, एक्शन, हिंसा और रिश्तों की कहानी को बड़े कैनवास पर पेश करती है।
फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता यश के किरदार और ‘KGF’ के बाद उनके नए अवतार को लेकर थी।
सवाल यही था कि क्या ‘Toxic’ यश के स्टारडम से आगे निकलकर एक मजबूत कहानी दे पाएगी? फिल्म का जवाब थोड़ा निराश करने वाला नजर आता है।
1947 के गोवा से शुरू होती है कहानी
‘Toxic’ की कहानी 1947 के गोवा से शुरू होती है और आगे कई वर्षों तक चलती है। फिल्म में अपराध की दुनिया, गैंगस्टर, सत्ता और हिंसा का ऐसा ताना-बाना दिखाया गया है, जिसमें यश का किरदार राया केंद्र में है।
फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट शानदार है। पुराने दौर के गैंगस्टर सिनेमा की झलक, बड़े सेट, नाइट क्लब, स्टाइलिश कॉस्ट्यूम और एक्शन सीक्वेंस फिल्म को भव्य बनाते हैं।
हालांकि, लगातार एक्शन और हिंसा के बीच कहानी कई जगह कमजोर पड़ती नजर आती है।
यश का स्वैग दमदार, लेकिन किरदार में गहराई कम
यश ने राया के किरदार में अपने स्टारडम और स्क्रीन प्रेजेंस का भरपूर इस्तेमाल किया है। उनका अंदाज, एक्शन और बॉडी लैंग्वेज दर्शकों का ध्यान खींचते हैं। फिल्म में कई ऐसे एक्शन सीन हैं जो बड़े पर्दे पर प्रभाव छोड़ते हैं।
लेकिन समस्या यह है कि राया के किरदार को भावनात्मक स्तर पर उतनी मजबूती नहीं मिलती।
फिल्म उसे परिस्थितियों से बना गैंगस्टर बताने की कोशिश करती है, मगर लगातार हिंसा और आक्रामक व्यवहार के कारण उसका इमोशनल पक्ष पूरी तरह उभर नहीं पाता।

कियारा आडवाणी ने जीता दिल
फिल्म में कियारा आडवाणी नादिया के किरदार में नजर आई हैं। वह एक सर्कस ट्रैपेज आर्टिस्ट का किरदार निभाती हैं और राया की जिंदगी में भावनात्मक बदलाव लाने वाली अहम कड़ी बनती हैं।
कियारा की एंट्री फिल्म के शुरुआती हिस्से को मजबूती देती है। उनकी मौजूदगी कहानी में कुछ सुकून और भावनात्मक जुड़ाव लाती है।
उनके और यश के बीच के हिस्से फिल्म के सबसे प्रभावी दृश्यों में शामिल हैं।
नयनतारा राया की बड़ी बहन गंगा के किरदार में हैं। उनके और राया के रिश्ते को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है, लेकिन आगे चलकर यह ट्रैक उतना प्रभावी नहीं रह जाता।
हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत भी कहानी में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं, लेकिन उनके किरदार काफी हद तक पुरुष पात्रों से जुड़े हुए दिखाई देते हैं।
यही वजह है कि फिल्म की महिला-केंद्रित अप्रोच उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ पाती।
कहानी से ज्यादा हावी है हिंसा
‘Toxic’ की सबसे बड़ी कमजोरी इसका जरूरत से ज्यादा हिंसक होना है। गोलीबारी, मारधाड़ और गैंगवार के लंबे सिलसिले के बीच कई बार ऐसा लगता है कि कहानी पीछे छूट गई है।
फिल्म का रनटाइम भी समस्या बढ़ाता है। कई सीक्वेंस जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं और इंटरवल तक कहानी उस स्तर का रोमांच पैदा नहीं कर पाती, जिसकी उम्मीद इतने बड़े प्रोजेक्ट से की जाती है।
आखिरी हिस्से में संभलती है फिल्म
फिल्म के अंतिम हिस्से में परिवार और रिश्तों से जुड़े कुछ भावनात्मक पहलू कहानी को थोड़ी गहराई देते हैं।
खासकर भाई-बहन और पिता-पुत्र से जुड़े ट्रैक में फिल्म कुछ देर के लिए अपने मूल विचार के करीब पहुंचती है।
लेकिन ये भावनात्मक पल काफी देर से आते हैं। तब तक फिल्म का बड़ा हिस्सा एक्शन और गैंगस्टर ड्रामा में निकल चुका होता है।
कैसी है ‘Toxic’?
अगर आप यश के फैन हैं और बड़े पर्दे पर जबरदस्त एक्शन, स्टाइल और स्टारडम देखना चाहते हैं तो ‘Toxic’ आपको कुछ हिस्सों में पसंद आ सकती है।
यश की स्क्रीन प्रेजेंस और कियारा आडवाणी का प्रदर्शन फिल्म की बड़ी ताकत है।
लेकिन अगर आप एक मजबूत कहानी, गहरे किरदार और संतुलित स्क्रीनप्ले की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो फिल्म निराश कर सकती है।
भव्य विजुअल और जबरदस्त एक्शन के बावजूद कहानी कई जगह बिखरी हुई लगती है।
कुल मिलाकर: ‘Toxic’ में यश का स्वैग और एक्शन भरपूर है, लेकिन कमजोर कहानी और जरूरत से ज्यादा हिंसा इसे एक यादगार गैंगस्टर फिल्म बनने से रोक देती है।
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