लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर दो बुजुर्गों से ठगे 1.30 करोड़, पुलिस ने 42 लाख कराए फ्रीज
Digital Arrest Case in Lucknow: राजधानी में साइबर अपराधियों ने फर्जी पुलिस, CBI, ATS और ED अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए दो बुजुर्गों से कुल 1.30 करोड़ रुपये की सनसनीखेज ठगी को अंजाम दिया है। जालसाजों ने मरीन नेवी कॉलेज के रिटायर्ड प्रिंसिपल को 5 दिनों तक बंधक बनाकर 52 लाख रुपये और इंदिरानगर की 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को 6 दिनों तक वीडियो कॉल पर डराकर 78.50 लाख रुपये ऐंठ लिए।
दोनों पीड़ितों की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने (Cyber Crime Police Station) में धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और धमकी देने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों मामलों में कुल 42 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं।
गोमतीनगर के विनीतखंड निवासी और सिक्किम स्थित मरीन नेवी कॉलेज के प्रिंसिपल कैप्टन (सेनि.) मोहन लाल आहूजा को 18 अगस्त को एक अनजान कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली मुख्यालय का इंस्पेक्टर जितेंद्र त्रिपाठी बताया और दावा किया कि उनके आईडी कार्ड से जारी सिम और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है।
इसके बाद ठगों ने खुद को ईडी अधिकारी बताते हुए उन्हें पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और परिवार को एटीएस द्वारा उठाने की धमकी दी। डरे हुए कैप्टन 19 अगस्त को लखनऊ (Lucknow) पहुंचे और अगले दिन ICICI बैंक जाकर जालसाजों के बताए खातों में 52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ADCP क्राइम किरन यादव के अनुसार, रकम केरल (Federal Bank) और पंजाब (India Post Payments Bank) के खातों में भेजी गई थी। एसीपी शाहिदा परवीन ने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर 20 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं।
75 वर्षीय वृद्धा से 78.50 लाख ठगे
इंदिरानगर के रवींद्रपल्ली निवासी 75 वर्षीय रत्ना कौल (जिनके पति का 2009 में निधन हो चुका है) को 13 अगस्त को व्हाट्सएप पर कॉल कर मुंबई में केनरा बैंक खाते से मानव तस्करी व मनी लॉन्ड्रिंग का फर्जी आरोप लगाया गया। ठगों ने पुलिस की वर्दी पहनकर फर्जी कार्यालय के बैकग्राउंड से वीडियो कॉल की और सुप्रीम कोर्ट व पुलिस की मुहर लगे फर्जी अरेस्ट वारंट दिखाए।
वृद्धा को हर 30 मिनट में वीडियो कॉल पर हाजिरी लगाने का दबाव बनाकर 6 दिनों तक Digital Arrest रखा गया। जब उनके खातों में पर्याप्त रकम नहीं मिली, तो ठगों ने बैंक व डाकघर में जमा एफडी तुड़वाकर 78.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस ने पीड़िता द्वारा उपलब्ध कराए गए छह नंबरों को सर्विलांस पर लगाया है और खातों से 22 लाख रुपये फ्रीज कराने में सफलता हासिल की है।
डिजिटल अरेस्ट फ्राड से कैसे बचें?
कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) जैसा कोई प्रावधान नहीं। CBI, ED, पुलिस, कस्टम्स या RBI कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। साइबर ठग विश्वास जीतने के लिए नकली पुलिस स्टेशन का सेटअप, पुलिस वर्दी और फर्जी अदालती नोटिस दिखाते हैं। ऐसे कॉल आने पर तुरंत कॉल काट दें।
इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, OTP, पिन या अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज न भेजें। जांच के नाम पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या ठगी का शिकार होने पर बिना घबराए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 साइबर हेल्पलाइन (Cyber Crime Helpline) पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को फ्रीज कराया जा सके।
Also Read: UPI और बैंकिंग ऐप्स को मिल सकता है Freeze बटन, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर लगेगी लगाम

