UP IAS Association: 13 साल पहले साथ अफसरों से किया वादा भूली यूपी आईएएस एसोसिएशन

गुजरी याद बनकर रह गया शीर्ष नौकरशाही का सालाना जलसा, बीते वर्षों में प्रशासनिक सेवा को अलविदा बोल चुके हैं कई अफसर

Sandesh Wahak Digital Desk: जिस राज्य की नौकरशाही देश में सबसे मजबूत समझी जाती है। वही आज सियासी दबाव में नतमस्तक है। मुद्दा यूपी के आईएएस अफसरों से जुड़ा है। जिनकी आईएएस एसोसिएशन साथियों से 13 साल पहले किया वादा भुला चुकी है।

तभी शीर्ष नौकरशाही का सालाना जलसा (एजीएम) और आईएएस एसोसिएशन वीक मानो गुजरे जमाने की बात हो चुका है। जबकि प्रदेश में एक के बाद एक आईएएस बीते वर्षों में सेवा को अलविदा बोल चुके हैं। इससे आईएएस अफसरों के भीतर आक्रोश पनप रहा है।

क्या सियासी दबाव में 2019 के बाद से नहीं आयोजित हो सका IAS वीक और एजीएम?

दरअसल 2013 में सूबे के आईएएस अफसरों ने संकल्प किया था कि एसोसिएशन अपना सालाना जलसा नियमित तौर पर आयोजित करेगी। आईएएस वीक में कैडर के तमाम बैच के अफसर आपस में मिलकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ गंभीर मुद्दों पर अपनी बेबाक राय और मांग रखते थे। अंतिम आईएएस वीक 2019 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सम्बोधित किया था। इसके बाद मानो किसी दबाव में एसोसिएशन ने खुद को मानो राजभवन कॉलोनी स्थित सीएसआई के एक कमरे तक सीमित कर लिया। वहीं से नई कार्यकारिणी घोषित हो जाती है। आईएएस पहले यूपी कैडर की छवि को लेकर बेहद संजीदा रहते थे। मौजूदा दौर में युवा अफसरों पर भी भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगने के बावजूद वरिष्ठ आईएएस को मानो कोई सरोकार ही नहीं रह गया है।

आईएएस अफसरों ने पूर्व में मांग उठायी थी कि अगर उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वंचित रखा जाता है तो इसका कारण भी बताया जाए। कुछ समय पहले आईएएस अनामिका सिंह ने वीआरएस मांगा था। हालांकि निजी कारण का हवाला दिया गया। लेकिन सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति के लिए एनओसी न दिया जाना इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। सालाना जलसे के दौरान आईएएस इलेवन बनाम सीएम इलेवन के बीच होने वाले मैत्री मैच से भी विधायिका और कार्यपालिका के बीच माहौल खुशनुमा होता था। फिलहाल ये सब गुजरे जमाने की बात हो चली है।

युवा अफसरों को क्या संदेश दे रहे हैं हम

पूर्व वरिष्ठ आईएएस कहते हैं कि बसपा शासन के दौरान पांच वर्षों तक आईएएस वीक नहीं हुआ था। वही सिलसिला पुन: शुरू हो गया है। वर्तमान दौर में नौकरशाही पर चंद वरिष्ठ आईएएस हावी हैं। वे खुद नहीं चाहते कि आईएएस वीक किया जाए। तभी सीएम के सामने स्टैंड नहीं लिया जा रहा है। युवा साथियों को हम क्या संदेश दे रहे हैं। यह गहन आत्ममंथन का विषय है। नौकरशाही को नियंत्रित करने का प्रयास हो रहा है। तभी असहज होकर कुछ अफसरों ने इस्तीफे तक दिए हैं। एसोसिएशन प्रभावशाली होती तो साथियों को सेवा में बरकऱार रहने के लिए तैयार कर सकती थी। अफसरों को एसोसिएशन के जरिये सामूहिक रूप से आगे आना चाहिए। हालांकि पूर्व में लिए गए फैसले आज तक अधूरे हैं। आज सत्ता के सामने बोलना खुद को सजा देने जैसा है।

…जब दुर्गा की बहाली को मजबूर हुई थी सरकार

यूपी आईएएस एसोसिएशन युवा अफसरों का मनोबल बचाने के प्रति कितनी लापरवाह बनी हुई है। इसका साक्षात उदाहरण आईएएस रिंकू सिंह राही का मामला है। इस ईमानदार युवा आईएएस ने हाल ही में तकनीकी इस्तीफे की पेशकश की है। कभी सौ करोड़ का घोटाला खोलने के कारण सात गोलियां खाने वाले रिंकू आज व्यवस्था से पूरी तरह खिन्न हो चुके हैं। वहीं एक दौर ऐसा भी था कि जब आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को उनकी पहली तैनाती के दौरान तत्कालीन सपा सरकार में सीएम अखिलेश यादव ने निलंबित किया था। तब आईएएस एसोसिएशन ने बैठक करके सीएम के सामने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। नतीजतन आईएएस एसोसिएशन के कड़े रुख के बाद युवा आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को बहाल करने के लिए सपा सरकार मजबूर हो गयी थी।

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