जब एक ही मंच पर मिलीं उर्दू और हिंदी दो बहनें, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी में सजा ऑल-इंडिया मुशायरा
Lucknow News: कोई भी भाषा तब तक जिंदा रहती है, जब तक उसमें कविता और गद्य लिखा जाता है। यह अल्फाज उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के सचिव शौकत अली के थे, जो उन्होंने अकादमी के ऑडिटोरियम में आयोजित शानदार ऑल-इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान व्यक्त किए।
यह शाम केवल शेरो-शायरी की नहीं, बल्कि भाषाई एकता की मिसाल बन गई। डॉ. हरिओम (IAS) की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में उर्दू की मिठास और हिंदी की ओजस्विता एक साथ देखने को मिली।
उर्दू-हिंदी: सगी बहनों जैसा रिश्ता
कार्यक्रम का आगाज मोमबत्तियां जलाकर पारंपरिक तरीके से किया गया। सचिव शौकत अली ने अपने संबोधन में एक बहुत ही प्यारी बात कही। उन्होंने कहा, उर्दू और हिंदी सगी बड़ी और छोटी बहनों की तरह हैं, जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। आज मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि दोनों बहनें एक ही मंच पर मौजूद हैं। इस तरह के आयोजनों से समाज में तालमेल बढ़ता है और उर्दू की मिठास दूर तक जाती है।

डॉ. हरिओम (IAS) का शायराना अंदाज
अपनी व्यस्तताओं के बावजूद चर्चित आईएएस अधिकारी और कवि डॉ. हरिओम पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने न केवल अध्यक्षता की, बल्कि एक शायर के तौर पर अपनी खूबसूरत गजल भी सुनाई, जिस पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि जिस तरह उर्दू अकादमी मुशायरा और कवि सम्मेलन का संयुक्त आयोजन करती है, उसी तर्ज पर हिंदी संस्थान को भी ऐसे साझा कार्यक्रम करने चाहिए। उन्होंने भाषाई मेलजोल के लिए साझा पुस्तकें प्रकाशित करने पर भी जोर दिया।
अकादमी के सचिव खलील खान ने सभी कवियों और शायरों का शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद महफिल की कमान मशहूर नाजिम नदीम फारुख ने संभाली, जिन्होंने अपने लच्छेदार अंदाज में मुशायरे का संचालन किया। मुशायरा रात साढ़े दस बजे तक अपनी पूरी रंगत में चलता रहा।
इस कार्यक्रम में अकादमी के पूर्व अधिकारियों, कर्मचारियों, ट्रेजरर और स्टडी सेंटर के छात्र-छात्राओं समेत बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अकादमी के सुपरिटेंडेंट मुमताज अहमद नदवी ने सभी मेहमानों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।
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