गाजा में इजराइल ने फिर मचाई तबाही, नक्बा की बरसी पर हमलों में 100 से ज्यादा फिलीस्तीनियों की मौत

नई दिल्ली: फिलीस्तीनी लोग 15 मई को जब 1948 में अपने देश से जबरन निकाले जाने की त्रासदी, यानी “नक्बा” (Nakba) की 77वीं बरसी मना रहे थे, उसी दिन इज़राइल ने गाजा पट्टी पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें 100 से अधिक लोगों की जान चली गई।

गौरतलब है कि मार्च से इजराइल ने गाजा पर मानवीय सहायता की आपूर्ति पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे भूखमरी जैसे हालात पैदा हो चुके हैं। इसके बावजूद बमबारी और हवाई हमले लगातार जारी हैं, जिससे फिलीस्तीनी जनता को राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।

खान यूनुस और जबालिया में भारी तबाही

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार तड़के और रातभर जारी हमलों में दक्षिणी गाजा के खान यूनुस शहर में कम से कम 61 लोग मारे गए। वहीं उत्तरी गज़ा के जबालिया में स्थित अल-तौबा मेडिकल क्लिनिक पर हुए एक हवाई हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इज़राइली सेना ने कथित रूप से गाजा के तीन अस्पतालों पर भी हमले किए, जिनमें जबालिया का अल-अव्दा अस्पताल, खान यूनुस का इंडोनेशियन अस्पताल और एक अन्य यूरोपियन अस्पताल शामिल हैं।

हमास ने अपने बयान में कहा है कि इज़राइल “गोलीबारी की आड़ में समझौता वार्ता की कोशिश कर रहा है।” दरअसल, इस समय इज़राइल और हमास के बीच क़तर, मिस्र और अमेरिकी मध्यस्थों की मौजूदगी में डोहा में अप्रत्यक्ष संघर्षविराम वार्ताएं चल रही हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख कैथरीन रसेल ने गुरुवार को चिंता जताते हुए बताया कि पिछले दो दिनों में इज़राइली हमलों में 45 से अधिक बच्चों की जान गई है। उन्होंने कहा, “गाजा में 10 लाख से अधिक बच्चे भुखमरी के खतरे में हैं। उन्हें न खाना मिल रहा है, न पानी और न ही दवाइयाँ।”

गजा में अब तक का जनसंहार

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस युद्ध की शुरुआत से अब तक इज़राइली हमलों में 53,010 फिलीस्तीनी मारे जा चुके हैं और लगभग 1,19,919 घायल हुए हैं। वहीं, सरकारी मीडिया कार्यालय के अनुसार, मलबे में दबे हजारों लोग अब भी लापता हैं, जिन्हें मृत माना जा रहा है। इस तरह मृतकों की संख्या बढ़कर 61,700 से अधिक हो चुकी है।

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