मऊ जेल में बंदी की आत्महत्या: जमानत खारिज होने पर परेशान था कैदी, कारागार मंत्री ने दिए जांच के आदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: मऊ जिला जेल में गैंगस्टर एक्ट के तहत बंद विचाराधीन कैदी अजीत रावत (निवासी विक्रमपुर, सैदपुर, गाजीपुर) की आत्महत्या के मामले में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने संज्ञान लिया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में लापरवाही उजागर होने पर जेल अधीक्षक ने दो आरक्षियों को निलंबित कर दिया है।
जमानत मिलने के बावजूद नहीं हो पाया रिहा
जेल प्रशासन के अनुसार, बंदी अजीत रावत पिछले माह अक्टूबर में गैंगस्टर एक्ट के तहत जमानत मिलने के बावजूद रिहा नहीं हो पाया था। कागजातों में कमी के चलते कोर्ट ने उसकी जमानत खारिज कर दी थी। जमानत मिलने के बाद लगभग एक महीने तक जेल में ही बंद रहने के कारण बंदी मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान था। बुधवार दोपहर को उसने हॉस्पिटल के पीछे रेन वाटर हार्वेस्टिंग पाइप के सहारे गमछे से लटककर आत्महत्या कर ली।
दो आरक्षी निलंबित, मंत्री ने दिए जांच के आदेश
जेल अधीक्षक आनंद कुमार शुक्ला ने बताया कि बंदी की आत्महत्या के समय बैरक की सुरक्षा में तैनात आरक्षी सत्य प्रकाश और अंकुर की प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इन दोनों की नजरों से बचकर ही बंदी ने आत्महत्या की। जेल अधीक्षक ने दोनों आरक्षियों को तत्काल निलंबित कर दिया है।
कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि यह मामला संज्ञान में है और मामले की जांच के लिए विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बंदी का आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, मृतक अजीत रावत पर चिरैयाकोट थाने में चोरी और आर्म्स एक्ट सहित कुल तीन मामले दर्ज थे। इन मामलों के बाद उस पर गैंगस्टर एक्ट में भी मामला दर्ज किया गया था, जिसके तहत उसने तीन माह पूर्व आत्मसमर्पण किया था और तभी से जेल में बंद था।
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