Pollution से बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का नया खतरा

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली एनसीआर में जहरीली हवा का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ एयर क्वालिटी इंडेक्स और खराब हो रहा है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। वायु प्रदूषण (Air Pollution ) का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खून और दिमाग तक को गहरा नुकसान पहुंचा रहा है। प्रदूषण (Pollution ) में मौजूद पीएम 2.5, पीएम 10 और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे कण शरीर में घुसकर कई तरह की खतरनाक प्रतिक्रियाएं शुरू कर देते हैं। आर्टेमिस हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी डॉ. विवेक बरुन बताते हैं कि यह जहरीली हवा कैसे खून को गाढ़ा बनाती है, ब्लड क्लॉटिंग बढ़ाती है और ब्रेन स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।

खून गाढ़ा होने का खतरा

जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो सूक्ष्म कण फेफड़ों के जरिए खून तक पहुंच जाते हैं। लंबे समय तक जहरीली हवा के संपर्क में रहने से शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ता है। इससे ब्लड सेल्स और प्रोटीन आपस में चिपकने लगते हैं, जो खून को गाढ़ा बनने की ओर ले जाता है। खून के गाढ़ा होने पर उसे नसों में बहने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यह स्थिति दिल के साथ-साथ दिमाग पर भी अतिरिक्त दबाव डालती है।

ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ता जोखिम

वायु प्रदूषण (Pollution ) का सबसे गंभीर असर प्लेटलेट्स पर पड़ता है। सामान्य स्थिति में प्लेटलेट्स शरीर में चोट लगने पर खून रोकने के लिए थक्का बनाते हैं, लेकिन प्रदूषण की वजह से प्लेटलेट्स बिना जरूरत अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इससे नसों के अंदर ही छोटे-छोटे क्लॉट बनने लगते हैं। जब ये थक्के दिमाग तक जाने वाली बारीक नसों में फंस जाते हैं, तो खून का प्रवाह रुक जाता है। यही रुकावट आगे चलकर इस्केमिक स्ट्रोक—जो कि सबसे आम प्रकार का ब्रेन स्ट्रोक है—में बदल सकती है।

नसों पर गहरा असर

जहरीली हवा नसों को भी कमजोर कर देती है। समय के साथ नसें संकरी होने लगती हैं, ऐसे में गाढ़ा हो चुका खून और मुश्किल से बह पाता है। यह स्थिति स्ट्रोक की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है। बुजुर्ग, बीपी के मरीज, हार्ट पेशेंट और डायबिटीज के रोगी इस जोखिम से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

दिल्ली एनसीआर की बिगड़ती हवा सिर्फ एक पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा साबित हो रही है। बढ़ता प्रदूषण खून को गाढ़ा कर, नसों को कमजोर कर और दिमाग में स्ट्रोक का खतरा बढ़ाकर लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाल रहा है। हवा का हर सांस अब खतरे से भरा हुआ है।

 

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