Lucknow News: कुपोषण बढ़ा रहा मौत और जटिलताओं का खतरा, विशेषज्ञों ने बताए ठोस समाधान
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Sandesh Wahak Digital Desk: गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार में पोषण की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए एसजीपीजीआईएमएस (लखनऊ) के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा राज्य स्तरीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए चिकित्सा विशेषज्ञों ने कुपोषण को मरीजों में बढ़ती मृत्यु दर और जटिलताओं का एक प्रमुख कारण बताया और इसके प्रभावी समाधान पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यशाला का उद्देश्य अस्पताल में भर्ती मरीजों में कुपोषण की समस्या को उजागर करना और समय पर पोषण हस्तक्षेप की आवश्यकता को रेखांकित करना था।
इस राज्य स्तरीय सीएमई में 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, पोषण विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. बनानी पोद्दार (आयोजन अध्यक्ष) और प्रो. अफजल अजीम (आयोजन सचिव) के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सीएमई के दौरान किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और एरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
इनमें अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए प्रारंभिक पोषण रणनीतियां, प्रतिरक्षा पोषण की भूमिका, एक्यूट लिवर फेल्यर तथा ऑन्कोलॉजी मरीजों के लिए पोषण प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए एक रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें रेजिडेंट डॉक्टरों, डाइटीशियनों और नर्सिंग स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार में पोषण एक अहम स्तंभ है। समय पर और सही पोषण हस्तक्षेप से न केवल रिकवरी में तेजी आती है, बल्कि जीवन रक्षा की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
आयोजकों के अनुसार, इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सा समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों को बेहतर और समग्र उपचार उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगी।
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