प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली के 9 टोल प्लाजा बंद करने पर विचार का निर्देश

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली-NCR में छाये जानलेवा स्मॉग और प्रदूषण के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने मैराथन सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि प्रदूषण के इस गंभीर दौर में सरकार को राजस्व (टोल की आय) से ऊपर जनहित और स्वास्थ्य को रखना होगा। अदालत ने जाम और उससे होने वाले धुएं को कम करने के लिए दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स पर बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों की लंबी कतारों से होने वाले उत्सर्जन (Emission) पर चिंता जताते हुए निर्देश दिया। MCD के 9 प्रमुख टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने की संभावना पर एक हफ्ते में फैसला लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि अगले साल से यह नियम बनाया जाए कि 1 अक्टूबर से 31 जनवरी तक कोई टोल नहीं लिया जाएगा। CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा, इतने प्रदूषण में हमें टोल से आय नहीं चाहिए। टोल पर लगने वाला जाम प्रदूषण को कई गुना बढ़ा देता है।

स्कूलों की बंदी पर दखल से इनकार

कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल बंद करने और मिड-डे मील के मुद्दे पर तीखी बहस हुई। वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि स्कूल बंद होने से गरीब बच्चों का मिड-डे मील रुक गया है और घर पर भी वे सुरक्षित नहीं हैं। CJI ने कहा कि स्कूल बंद करना एक अस्थायी ‘नीतिगत निर्णय’ है। चूंकि जल्द ही शीतकालीन अवकाश (Winter Vacation) शुरू होने वाला है, इसलिए अदालत इसमें दखल नहीं देगी। यह सरकार तय करे कि हाइब्रिड मॉडल (ऑनलाइन + ऑफलाइन) चलाना है या नहीं।

सुनवाई के दौरान CJI ने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि गुड़गांव रोड पर इतना भीषण जाम रहता है कि लोग प्रदूषण और ट्रैफिक के डर से फंक्शन में जाना तक छोड़ चुके हैं। कोर्ट ने NHAI को सुझाव दिया कि टोल प्लाजा को शहर की सीमा से काफी दूर (लगभग 50 किमी) शिफ्ट करने पर विचार करें ताकि ट्रैफिक डायवर्ट हो सके।

प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर लगी रोक से प्रभावित मजदूरों के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सरकार ने बताया कि 2.5 लाख मजदूर रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 35 हजार का वेरिफिकेशन हो चुका है। पैसा सीधे आधार से जुड़े खातों में भेजा जाए। समय पर पैसा मिलेगा, तभी वह मजदूरों के काम आएगा।

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