बंगाल चुनाव में सीएम योगी के भाषण का असर, हिंदुत्व की पिच पर पस्त हुई ममता की सत्ता

Lucknow News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ऐतिहासिक बढ़त के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों और उनके तीखे तेवरों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। 2011 से काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस बार बीजेपी के ‘हिंदुत्व’ के एजेंडे के सामने पिछड़ती नजर आ रही है। सीएम योगी ने अपनी रैलियों के जरिए न केवल तुष्टीकरण की राजनीति पर हमला बोला, बल्कि बुलडोजर और जय श्रीराम के नारों से चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया।

ममता दीदी, अब सिंहासन खाली करो

माथाभांगा और धुपगुड़ी की जनसभाओं में योगी आदित्यनाथ ने सीधे तौर पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी थी। उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा था, ममता बनर्जी अब सिंहासन खाली करो, क्योंकि बीजेपी आ रही है। टीएमसी के गुंडे आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। उनके इस आत्मविश्वास ने बंगाल के भयभीत मतदाताओं में सुरक्षा का भाव पैदा किया।

हिंदुत्व बनाम तुष्टीकरण की जंग

सीएम योगी ने ममता सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया था कि बंगाल में दुर्गा पूजा और विसर्जन की अनुमति नहीं दी जाती, जबकि गोहत्या को बढ़ावा दिया जाता है। उन्होंने कहा था, ममता दीदी को जय श्रीराम के उद्घोष से चिढ़ है, क्योंकि वह सिर्फ मुस्लिम तुष्टीकरण में जुटी हैं। बंगाल को मौलानाओं के फतवों या काबा की धरती नहीं बनने दिया जाएगा। यह मां काली, मां दुर्गा और वंदे मातरम की पावन धरती ही रहेगी।

बंगाल चुनाव में सीएम योगी की गर्जना का असर, हिंदुत्व की पिच पर पस्त हुई ममता की सत्ता

बुलडोजर की धमक और अपराधियों में खौफ

अपनी एक चर्चित रैली में सीएम योगी ने कहा था कि यूपी के बुलडोजर की गूंज सुनकर टीएमसी के अपराधी अभी से भूमिगत (अंडरग्राउंड) होने लगे हैं। उन्होंने वादा किया था कि 4 मई के बाद ये गुंडे घुटने टेक कर नाक रगड़ते नजर आएंगे और बीजेपी जनता को भयमुक्त वातावरण देगी। भ्रष्टाचार और अराजकता से त्रस्त जनता के लिए यह ‘बदलाव का बिगुल’ साबित हुआ।

उर्दू बनाम बांग्ला का मुद्दा

नादिया और राजारहाट की रैलियों में योगी ने क्षेत्रीय अस्मिता को भी छुआ। उन्होंने टीएमसी के उन बयानों पर पलटवार किया जिनमें बंगाल की आबादी पर उर्दू थोपने या नयन में मदीना की बात कही गई थी। योगी ने स्पष्ट किया कि बंगाल की धरती से सिर्फ बांग्ला बोली जाएगी और यहां की जनता के नयनों में चैतन्य महाप्रभु का निवास है।

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