बुंदेलखंड में बड़ा बीमा घोटाला: बीडा की अधिग्रहित जमीन पर जालसाजों ने हड़पे 4.26 करोड़

झांसी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में जालसाजी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) द्वारा पहले से अधिग्रहित की जा चुकी जमीन पर फर्जी खतौनी लगाकर ₹4.26 करोड़ का बीमा क्लेम डकार लिया गया। इस पूरे खेल में सरकारी तंत्र और सत्यापन करने वाले कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फर्जीवाड़े का मुख्य केंद्र: डगरवाह और बाजना गाँव

पड़ताल में सामने आया है कि जालसाजों ने बबीना ब्लॉक के उन गांवों को निशाना बनाया जहाँ बीडा ने दो साल पहले ही किसानों को मुआवजा देकर जमीन अपने कब्जे में ले ली थी।

गाँववार फर्जीवाड़े का विवरण:

गाँव का नाम | फर्जी खतौनी/खसरा | हड़पी गई रकम | खातों की संख्या |

| :— | :— | :— | :— | | डगरवाह | 314 खतौनी | ₹3.29 करोड़ | – | | बाजना | 444 सरकारी नंबर (1312 खसरे) | ₹1.26 करोड़ | 94 खाते | | कुल (लगभग) | 2300+ खसरा नंबर | ₹4.26 करोड़+ | 250+ खाते |

कैसे हुआ यह ‘खेल’?

जालसाजों ने जानबूझकर सरकारी खाते में दर्ज जमीनों का उपयोग किया ताकि सत्यापन के दौरान आसानी से पकड़ में न आएं। नियमतः लेखपाल और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि को मौके पर जाकर सत्यापन करना होता है। इतनी बड़ी गड़बड़ी होने से इन कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।

छानबीन में यह भी पता चला कि कुछ खसरा नंबरों पर वास्तविक रकबे से दोगुना तक बीमा क्लेम भरा गया था। बमेर, इमलिया, बछौनी, बैदोरा, बसई, परासई और अमरपुर जैसे गांवों में भी इसी तरह की गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासनिक कार्रवाई: 20,000 किसानों के भुगतान पर रोक

इस घोटाले का खुलासा होने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कदम उठाए है। जिनमें जनसुविधा केंद्रों (CSC) के माध्यम से कराए गए 20,000 किसानों के खरीफ सीजन के बीमा क्लेम रोक दिए गए हैं।

उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह के अनुसार, 10,000 संदिग्ध मामलों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों से रकम की रिकवरी की जाएगी और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

“वर्तमान में तहसील वार जांच चल रही है। केसीसी धारक 67,000 किसानों को क्लेम दिया जा चुका है, शेष खातों में जांच पूरी होने के बाद ही राशि भेजी जाएगी। गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

महेन्द्र पाल सिंह, उपनिदेशक कृषि

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