राप्ती मुख्य नहर के खड़ंजा निर्माण में भ्रष्टाचार की बू, घटिया ईंटों के इस्तेमाल से हो रहा है निर्माण
दो करोड़ की लागत, लेकिन, गुणवत्ता गायब! नहर की पटरी पर खड़ंजा लगने की योजना सवालों में के घेरे में
बलरामपुर/तुलसीपुर। एक ओर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आम जनमानस को लाभ पहुंचाने के लिए विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ विभागीय अधिकारी और ठेकेदार इन योजनाओं में “सिंध लगाने” से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सरयू (राप्ती) मुख्य नहर के निर्माण खंड, तुलसीपुर अंतर्गत सामने आया है, जहां खड़ंजा निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार राप्ती मुख्य नहर के किलोमीटर संख्या 70 से 80 तक, लगभग 10 किलोमीटर लंबी नहर पटरी के बाईं ओर खड़ंजा निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य की लागत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। मानकों के अनुसार यहां अव्वल दर्जे की ईंटों और बालू का प्रयोग किया जाना था, लेकिन मौके पर इससे उलट स्थिति देखने को मिल रही है।

खड़ंजे की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खड़ंजा निर्माण में प्रथम श्रेणी की ईंटों के बजाय थर्ड क्लास पीली ईंटों, दोयम व मीठी ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ईंटों के बीच गैप भरने के लिए बालू के स्थान पर नहर से निकाली गई मिट्टी डाल दी जा रही है। ऊपर से मिट्टी बिछाकर निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे खड़ंजे की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि खड़ंजा कुछ ही दिनों में बैठने लगेगा। बालू की जगह मिट्टी डाली जा रही है, यह खुली लूट है। किसान का कहना है कि सरकार पैसा दे रही है अच्छे काम के लिए, लेकिन ठेकेदार घटिया ईंट लगाकर लाखों का खेल कर रहे हैं। वहीं, एक ग्रामीण का कहना है कि हम लोगों ने कई बार अधिकारियों को बताया, लेकिन काम पहले जैसा ही चल रहा है।

जिम्मेदारों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मामले को लेकर जब राप्ती मुख्य नहर निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) सुरेंद्र कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। निर्माण कार्य की जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कब तक होती है और दोषी पाए जाने पर संबंधित फर्म व ठेकेदार पर वास्तव में कोई कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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