अखलाक हत्याकांड: कांग्रेस ने किया कोर्ट के फैसले का स्वागत, जज सौरभ द्विवेदी की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: दादरी के बहुचर्चित अखलाक हत्याकांड में उत्तर प्रदेश सरकार को तगड़ा झटका लगा है। गौतम बुद्ध नगर (सूरजपुर) जिला अदालत ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने की राज्य सरकार की अर्जी को खारिज कर दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने अदालत के इस साहसी निर्णय का स्वागत किया है और मामले की सुनवाई करने वाले जज की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
जज की सुरक्षा और सरकार पर तीखे प्रहार
कांग्रेस नेता शाहनवाज आलम ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अदालत ने सरकारी दबाव के आगे न झुककर न्याय की गरिमा को बरकरार रखा है। उन्होंने सुरक्षा को लेकर निम्नलिखित मांगें की हैं। शाहनवाज आलम ने जस्टिस लोया प्रकरण का हवाला देते हुए सरकार के खिलाफ फैसला सुनाने वाले अतिरिक्त जिला जज सौरभ द्विवेदी की सुरक्षा तत्काल बढ़ाने की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मॉब लिंचिंग के आरोपियों को बचाने के लिए मुकदमे वापस लेने की कोशिश की थी, लेकिन जिला अदालत ने इसे विफल कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन
शाहनवाज आलम ने आरोप लगाया कि योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2018 में भीड़ हिंसा (Mob Lynching) की रोकथाम के लिए जारी गाइडलाइंस की अनदेखी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हर जिले में एसपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी को भीड़ हिंसा और हेट स्पीच रोकने के लिए तैनात करने का आदेश दिया था, जिसे यूपी में लागू नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने पीड़ितों के पुनर्वास के लिए विशेष स्कीम बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार ने इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2015 में गौतम बुद्ध नगर के बिसाहड़ा गांव में गोमांस रखने के आरोप में भीड़ ने अखलाक अहमद की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में योगी सरकार ने अदालत में अर्जी दाखिल कर आरोपियों पर लगे केस वापस लेने की अनुमति मांगी थी, जिसे अब सूरजपुर कोर्ट ने नामंजूर कर दिया है।

