किडनी के मरीजों के लिए वरदान है Statin Therapy, रिसर्च में खुलासा

Sandesh Wahak Digital Desk: दुनियाभर में हर साल किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कई ऐसे मरीज होते हैं जिनकी हालत इस बीमारी के कारण काफी गंभीर हो जाती है। ऐसे मरीजों को इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है जहां उनकी जान को लगातार जोखिम बना रहता है। लेकिन अब ऐसे गंभीर मरीजों के इलाज को लेकर एक नई उम्मीद सामने आई है। अमेरिका में हुई एक बड़ी ऑब्जर्वेशनल स्टडी के मुताबिक किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों में स्टैटिन थेरेपी (Statin Therapy) काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

रिसर्च में क्या सामने आया

मरीजों पर हुई इस रिसर्च को यूरोपियन जर्नल और साइंटिफिक रिपोर्ट्स में पब्लिश किया गया है। रिसर्च में बताया गया है कि अगर मरीजों को स्टैटिन थेरेपी (Statin Therapy) दी जाए तो 30 दिनों के भीतर मौत का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। स्टडी में यह भी सामने आया कि किडनी की गंभीर बीमारी वाले कई मरीजों में इंट्रासेरेब्रल हैमरेज यानी ब्रेन ब्लीड की समस्या भी हो जाती है जो आम होने के साथ बेहद गंभीर मानी जाती है और इससे मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है तथा मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि रिसर्च में यह संकेत मिला कि स्टैटिन दवाएं इस स्थिति में भी बचाव में फायदेमंद हो सकती हैं।

कैसे की गई रिसर्च

इस रिसर्च में करीब 1900 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें किडनी की गंभीर बीमारी थी और जिनकी जान को खतरा बना हुआ था। ये सभी मरीज आईसीयू में भर्ती थे। इनमें से 654 मरीजों को आईसीयू में स्टैटिन थेरेपी दी गई जबकि बाकी मरीजों को स्टैटिन (Statin) नहीं दी गई। रिसर्च के नतीजों में सामने आया कि स्टैटिन (Statin Therapy) लेने वाले मरीजों में 30 दिनों की मृत्यु दर काफी कम थी और स्टैटिन थेरेपी से मौत का खतरा लगभग 52 प्रतिशत तक कम हो गया।

रिसर्च से यह भी पता चला कि स्टैटिन (Statin Therapy) केवल कोलेस्ट्रॉल को कम करने तक सीमित नहीं है बल्कि एक्यूट किडनी डिजीज और इंट्रासेरेब्रल हैमरेज जैसी स्थितियों में भी यह फायदेमंद हो सकती है। यह शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकती है और ब्लड वेसल्स की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर मरीज में स्टैटिन थेरेपी (Statin Therapy) शुरू करने का फैसला उसकी व्यक्तिगत क्लिनिकल स्थिति को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।

कैसे दी जाती है Statin Therapy

स्टैटिन थेरेपी (Statin Therapy) शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज का लिपिड प्रोफाइल और हार्ट तथा किडनी से जुड़े अलग अलग टेस्ट करते हैं। इसके बाद आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति को पहले स्थिर किया जाता है और फिर यह तय किया जाता है कि कौन सी स्टैटिन (Statin) दवाएं दी जानी हैं। आमतौर पर कम डोज से शुरुआत की जाती है और यह दवाएं मरीजों को मुंह से या फिर फीडिंग ट्यूब के जरिए दी जाती हैं।

 

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