अब भारत के बच्चों के लिए नए हेल्थ पैरामीटर्स तय करेगा ICMR
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR अब भारत के बच्चों और किशोरों के लिए नॉर्मल हेल्थ पैरामीटर्स तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि डॉक्टर बच्चों के स्वास्थ्य की सही और सटीक जांच कर सकें। अभी तक देश में बच्चों की रिपोर्ट को जांचने के लिए जिन नॉर्मल रेंज का इस्तेमाल होता रहा है, वह अधिकतर विदेशों के डेटा पर आधारित होती है। भारत के बच्चों की जीवनशैली, खानपान और पर्यावरण अलग होने के कारण ऐसे विदेशी मानक कई बार सही तस्वीर नहीं दिखा पाते, जिससे गलत निष्कर्ष और अनावश्यक इलाज की स्थिति बन जाती है।
क्यों जरूरी है ICMR के अलग मानक?
भारत के बच्चों का पोषण स्तर, विटामिन और मिनरल्स की उपलब्धता, रहन सहन और पर्यावरणीय परिस्थितियां विदेशी बच्चों से अलग होती हैं। ऐसे में विदेशों के नॉर्मल हेल्थ पैरामीटर्स को सीधे अपनाना कई बार सही नहीं होता। इसी कारण ICMR ने भारत-विशेष नॉर्मल रेंज तैयार करने की पहल की है। इससे डॉक्टरों को बच्चों की रिपोर्ट समझने में स्पष्टता मिलेगी और गलत डायग्नोसिस की संभावना कम होगी।
ICMR के मुताबिक इस अध्ययन के तहत देश के 11 बड़े मेडिकल संस्थानों से स्वस्थ बच्चों और किशोरों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इसमें उनकी उम्र, वजन, ब्लड टेस्ट, शरीर के अंगों का विकास, पाचन से जुड़े संकेत और अन्य स्वास्थ्य जांच से संबंधित जानकारियां शामिल होंगी। इस डेटा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि भारत के बच्चों और किशोरों के लिए कौन से हेल्थ पैरामीटर्स सामान्य माने जाने चाहिए।
डॉक्टरों और बच्चों को कैसे मिलेगा फायदा?
ICMR के द्वारा नए नॉर्मल हेल्थ पैरामीटर्स तय होने के बाद डॉक्टर ब्लड टेस्ट और अन्य जांच रिपोर्ट की सही व्याख्या कर पाएंगे। इससे बच्चों में संभावित बीमारियों की समय पर पहचान संभव होगी और अनावश्यक दवाओं या इलाज से बचा जा सकेगा। यह अध्ययन न सिर्फ इलाज की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि स्वास्थ्य नीतियां बनाने और बच्चों के पोषण व विकास से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने में भी मददगार साबित होगा।
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