जब असिस्टेंट डायरेक्टर होने पर भी Javed Akhtar को उठाने पड़ते थे जूते

Sandesh Wahak Digital Desk: जावेद अख्तर (Javed Akhtar) हिंदी सिनेमा के उन नामों में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी कलम से फिल्म इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयां दी हैं। बेहतरीन गीतों और कालजयी फिल्मों की कहानियों के लिए पहचाने जाने वाले जावेद अख्तर का यह मुकाम आसान नहीं रहा। आज जिस सम्मान और पहचान के साथ उनका नाम लिया जाता है, उसके पीछे लंबा संघर्ष और कड़वा अनुभव छिपा हुआ है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर बनने से पहले जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया था, लेकिन यह दौर उनके लिए बेहद अपमानजनक साबित हुआ। हाल ही में जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि आज और पहले के दौर में असिस्टेंट डायरेक्टर की स्थिति में जमीन आसमान का फर्क है। उन्होंने खुलकर बताया कि किस तरह पहले असिस्टेंट डायरेक्टर को न तो सम्मान मिलता था और न ही उसकी पहचान होती थी।

अपमानजनक थी Javed Akhtar की पोजीशन

इन दिनों जयपुर में 19वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन हो रहा है, जो 15 से 19 जनवरी तक चलेगा। इस कार्यक्रम में जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने भी शिरकत की और बॉलीवुड में अपने शुरुआती दिनों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज फिल्म इंडस्ट्री काफी व्यवस्थित हो चुकी है, लेकिन जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था और असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे, तब इस पद की स्थिति बेहद अपमानित करने वाली थी।

जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने बताया कि उस दौर में असिस्टेंट डायरेक्टर को क्रिएटिव व्यक्ति नहीं, बल्कि एक नौकर की तरह देखा जाता था। उसका काम सिर्फ निर्देश देना नहीं, बल्कि सेट पर हर छोटे बड़े काम को बिना सवाल किए करना होता था।

Javed Akhtar

करना पड़ता था जूते उठाने का काम

जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय असिस्टेंट डायरेक्टर को किस तरह के काम करने पड़ते थे। उन्होंने कहा कि उनसे पूछा जाता था तुम्हारा काम क्या है और फिर तुरंत आदेश दिया जाता था कि जल्दी से मैडम के जूते लेकर आओ। हीरो का कोट कहां है और जैकेट कहां है जैसे काम करना उनकी जिम्मेदारी होती थी।

उन्होंने बताया कि उस समय वे खुद को असिस्टेंट डायरेक्टर बताते जरूर थे, लेकिन व्यवहार ऐसा किया जाता था जैसे उनकी कोई अहमियत ही न हो। आज के दौर में जहां असिस्टेंट डायरेक्टर स्टार्स को नाम लेकर बुलाते हैं, वहीं उस समय ऐसा सोचना भी मुमकिन नहीं था। जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने कहा कि आज के असिस्टेंट डायरेक्टर्स को देखकर उन्हें डर भी लगता है, क्योंकि उनके जमाने में यह साहस कोई कर ही नहीं सकता था।

संघर्ष से मिली पहचान और सम्मान

हिंदी सिनेमा में बड़ा और खास मुकाम हासिल करने से पहले जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने कड़ा संघर्ष किया और कई तरह के काम किए। असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में मिले अपमानजनक अनुभवों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लेखनी को ही अपनी ताकत बनाया।

जिसके बाद समय के साथ उनकी कलम ने वो जादू दिखाया, जिसने उन्हें हिंदी सिनेमा के महान गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में स्थापित कर दिया। जावेद अख्तर (Javed Akhtar) का यह सफर आज के युवाओं के लिए एक सबक है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर हुनर और जज्बा मजबूत हो तो इंसान अपनी पहचान खुद बना सकता है।

 

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