Heart Attack के बाद खुद को ऐसे रिपेयर करता है दिल

Sandesh Wahak Digital Desk: हम सभी के बीच अब तक यह आम धारणा रही है कि हार्ट अटैक (Heart Attack) आने के बाद दिल को हुआ नुकसान स्थायी होता है और उसकी भरपाई संभव नहीं होती, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से आई एक नई रिसर्च इस सोच को चुनौती देती है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि Heart Attack के बाद इंसानी दिल खुद को रिपेयर करने की क्षमता रखता है और समय के साथ इसमें सुधार हो सकता है। यह रिसर्च प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Circulation Research में प्रकाशित हुई है।

क्या होता है Heart Attack?

दरअसल Heart Attack तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट आ जाती है। इस रुकावट के कारण दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और हार्ट सेल्स मरने लगते हैं। यही स्थिति हार्ट अटैक का कारण बनती है, जो कई बार जानलेवा साबित होती है। कई मामलों में Heart Attack के बाद कार्डियक अरेस्ट भी हो सकता है, जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है।

वहीं Heart Attack के बाद शरीर नुकसान की भरपाई स्कार टिश्यू बनाकर करता है, लेकिन यह टिश्यू दिल की मांसपेशियों को पहले जैसी ताकत नहीं दे पाता। लंबे समय तक मेडिकल साइंस यही मानता रहा कि एक बार दिल की मांसपेशियों को नुकसान हो गया तो वह कभी ठीक नहीं हो सकता। हालांकि इस नई रिसर्च में बताया गया है कि दिल के सेल्स दोबारा भी बन सकते हैं और रिपेयर की प्रक्रिया संभव है।

दिल में बनती हैं नई मसल सेल्स

रिसर्च के अनुसार Heart Attack के बाद इंसानी दिल में नई मसल सेल्स बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस स्टडी के पहले लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रॉबर्ट ह्यूम का कहना है कि अब तक यही माना जाता था कि Heart Attack के बाद डैमेज हुआ हिस्सा हमेशा के लिए खराब हो जाता है। इसी वजह से Heart के मरीजों को जीवनभर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती थी। लेकिन इस रिसर्च में सामने आया है कि स्कार बनने के बावजूद दिल में नई सेल्स और मांसपेशियां विकसित हो सकती हैं, जिससे भविष्य में Heart डिजीज का खतरा भी कम हो सकता है।

पूरी तरह ठीक होने में लगेगा समय

डॉ ह्यूम के मुताबिक यह खोज बेहद अहम है, लेकिन फिलहाल यह हार्ट को पूरी तरह ठीक करने के लिए पर्याप्त नहीं है। दिल में रिपेयर की यह प्रक्रिया जरूर होती है, लेकिन इसकी रफ्तार बहुत धीमी होती है और यह गंभीर नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर पाती। ऐसे में भविष्य में रिसर्च का लक्ष्य ऐसी थैरेपी विकसित करना है, जिससे दिल की रिपेयर क्षमता को बढ़ाया जा सके और Heart Attack के बाद रिकवरी को बेहतर बनाया जा सके।

 

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