‘कांशीराम जी को दिया जाए भारत रत्न, अब और देर न करे केंद्र’, मायावती की सरकार से मांग

Sandesh Wahak Digital Desk: 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर जहाँ पूरा देश जश्न में डूबा है, वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर केंद्र सरकार के सामने अपनी पुरानी मांग को मजबूती से दोहराया है। उन्होंने बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजने की पुरजोर वकालत की है।

‘स्वाभिमान के प्रतीक हैं कांशीराम’

सोमवार को जारी अपने अधिकारिक बयान में मायावती ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कांशीराम जी ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के गरीबों, शोषितों और उपेक्षितों को आत्म-सम्मान और स्वाभिमान दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्हें भारत रत्न देने में अब और देरी नहीं की जानी चाहिए।

मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों को नसीहत देते हुए कुछ अहम बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि संविधान पर गर्व करना तभी सार्थक होगा जब सरकारें बड़े-बड़े दावों और लुभावने वादों के जाल से बाहर निकलें।

लोकतंत्र का महत्व तभी है जब सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के जीवन में वास्तविक और बहु-अपेक्षित सुधार आए। इस दौरान उन्होंने हाल ही में घोषित पद्म पुरस्कारों और वीरता पुरस्कारों से सम्मानित होने वाले विजेताओं और उनके परिवारों को बधाई भी दी।

पद्म पुरस्कारों के बीच उठी भारत रत्न की मांग

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई थी। ऐसे में मायावती का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उनकी इस मांग को आगामी चुनावों से पहले दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटबैंक को एकजुट करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

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