केरल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, राजीव चंद्रशेखर समेत 3 दिग्गजों ने जीता किला

Sandesh Wahak Digital Desk: केरल की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब राज्य में केवल ‘वोट-कटवा’ पार्टी नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति बन चुकी है। दशकों से चले आ रहे वामपंथी एलडीएफ और कांग्रेस यूडीएफ के द्विपक्षीय मुकाबले के बीच भाजपा ने तीन सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

इन तीन दिग्गजों ने रचा इतिहास

भाजपा ने इस बार न केवल अपना खाता खोला, बल्कि तीन महत्वपूर्ण सीटों पर कब्जा जमाया।

नेमोम (तिरुवनंतपुरम): प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने खुद मोर्चा संभाला और 4,978 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर भाजपा की प्रतिष्ठा बहाल की।

चथन्नूर (कोल्लम): भाजपा उम्मीदवार बीबी गोपकुमार ने 4,398 वोटों से शानदार जीत हासिल की, जिससे यह क्षेत्र अब भाजपा के मजबूत गढ़ के रूप में उभरा है।

कझाकोट्टम: केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने कड़े मुकाबले में 428 मतों के अंतर से जीत हासिल कर विधानसभा में अपनी जगह पक्की की।

भ्रष्टाचार और सबरीमाला के अपमान का बदला: राजीव चंद्रशेखर

जीत के बाद पार्टी मुख्यालय में उत्साहित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और माकपा दावा कर रहे थे कि हमारा खाता भी नहीं खुलेगा, लेकिन जनता ने उनके घमंड को तोड़ दिया है। यह जीत भ्रष्टाचार और सबरीमाला से जुड़े भावनात्मक मुद्दों पर सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ जनता का करारा जवाब है।” उन्होंने इसे ‘माकपा विरोधी जनादेश’ करार दिया।

नेमोम और चथन्नूर: भाजपा के नए ‘पावर सेंटर’

केरल की राजनीति में नेमोम सीट भाजपा के लिए हमेशा से खास रही है, जहां 2016 में ओ राजगोपाल ने पहली बार कमल खिलाया था। 2021 की हार के बाद 2026 में राजीव चंद्रशेखर की जीत ने इसे फिर से भाजपा का केंद्र बना दिया है। वहीं, कोल्लम की चथन्नूर सीट पर बीबी गोपकुमार की जीत यह दर्शाती है कि भाजपा का आधार अब शहरी केंद्रों से निकलकर ग्रामीण अंचलों में भी गहराई तक पहुंच चुका है।

केरल में ‘तीसरे ध्रुव’ का उदय

विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 में सुरेश गोपी की लोकसभा जीत और फिर स्थानीय निकायों में मिली सफलता के बाद अब 2026 के ये विधानसभा परिणाम भाजपा को केरल में एक ‘सशक्त विकल्प’ के रूप में स्थापित कर चुके हैं। अब विधानसभा के भीतर भाजपा-एनडीए के तीन विधायक भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर आवाज बुलंद करेंगे।

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