Lucknow News: मोदी-ट्रंप ट्रेड डील के खिलाफ AAP कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन

Lucknow News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए हालिया व्यापारिक समझौते (Trade Deal) के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने आज उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर मोर्चा खोल दिया। राज्यसभा सांसद संजय सिंह के आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने लखनऊ समेत गाजियाबाद, वाराणसी, मेरठ और आगरा जैसे शहरों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और इस समझौते को ‘थ्रेट डील’ (Threat Deal) करार दिया।

लखनऊ के स्वास्थ्य भवन चौराहे पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिलाध्यक्ष इरम रिजवी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी हितों के लिए खोलकर हमारे किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर दस्तखत कर दिए हैं। अमेरिका हमारे उत्पादों पर 18% टैक्स लगाएगा, जबकि उनके उत्पादों को भारत में टैक्स-फ्री एंट्री मिलेगी। यह देश के स्वाभिमान को गिरवी रखने जैसा है।

महंगा तेल और रूस से दूरी पर उठे सवाल

पार्टी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव में आकर भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है।

नुकसान का दावा: आप नेताओं का कहना है कि रूस से तेल न खरीदने के कारण देश को मिलने वाली 1,53,000 करोड़ रुपये की बचत खत्म हो जाएगी।

महंगी खरीद: अब वेनेजुएला और अमेरिका से 80,000 करोड़ रुपये महंगा तेल खरीदा जाएगा, जिसका बोझ सीधा आम जनता की जेब पर पड़ेगा।

लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। इस दौरान आप नेताओं ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप भी लगाया। ‘आप’ ऑटो विंग के प्रदेश अध्यक्ष प्रीत पाल सलूजा की पगड़ी उतरने की घटना को पार्टी ने पूरे सिख समाज का अपमान बताते हुए कड़ी निंदा की है।

Lucknow News: मोदी-ट्रंप ट्रेड डील के खिलाफ AAP कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

निवर्तमान महासचिव दिनेश पटेल ने व्यापारिक असमानता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बांग्लादेश जैसे देशों के कपड़ों पर टैक्स नहीं है, लेकिन भारतीय कपड़ों पर टैक्स थोपा जा रहा है। प्रदर्शन के अंत में कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा, जिसमें मांग की गई कि इस ‘देश विरोधी’ ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए। किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो। विदेशी दबाव में लिए जा रहे आर्थिक फैसलों पर पारदर्शिता बरती जाए।

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