Swasa App से बदलेगा सांस संबंधी बीमारियों की पहचान का तरीका

Sandesh Wahak Digital Desk: AI की मदद से हेल्थ सेक्टर में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ऐसी तकनीकें विकसित की जा रही हैं जो कम समय में बीमारी की पहचान करने में सक्षम हैं। इसी क्रम में एक नई तकनीक सामने आई है, जिसके जरिए केवल खांसने की आवाज से सांस संबंधी बीमारी का पता लगाया जा सकता है। AI प्लेटफॉर्म Swasa App तैयार किया गया है, जो खांसी की आवाज सुनकर श्वसन संबंधी बीमारियों की पहचान करने में सक्षम है। इस तकनीक को एम्स से भी हरी झंडी मिल चुकी है।

कैसे काम करता है Swasa App?

दरअसल यह AI आधारित एप्लिकेशन Swasa App मोबाइल फोन पर चलाया जा सकता है। उपयोगकर्ता को फोन के सामने दो से तीन बार खांसना होता है। एप खांसी की आवाज को रिकॉर्ड करता है और एआई एल्गोरिद्म के माध्यम से उसका विश्लेषण करता है। इसके बाद करीब आठ मिनट में रिपोर्ट तैयार हो जाती है, जिसमें सांस संबंधी बीमारी की जानकारी दी जाती है।

एम्स में हुआ ट्रायल

वहीं इस तकनीक Swasa App का ट्रायल एम्स नई दिल्ली में किया गया। इस एप की तुलना गोल्ड स्टैंडर्ड स्पाइरोमेट्री टेस्ट से की गई और यह काफी प्रभावी पाया गया। करीब 460 मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया। रिसर्च में सामने आया कि यह App शुरुआती स्तर पर अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज की पहचान आसानी से कर सकता है। केवल खांसने से यह पता लगाया जा सकता है कि मरीज को कौन सी सांस संबंधी बीमारी है और वह किस स्तर पर है।

एक्स-रे और सीटी स्कैन का विकल्प नहीं

दरअसल माना जा रहा है कि सांस संबंधी बीमारियों की पहचान के लिए आमतौर पर एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसे परीक्षण किए जाते हैं। हालांकि यह Swasa App शुरुआती और मध्यम स्तर की बीमारी की पहचान में मददगार साबित हो सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्पाइरोमेट्री जैसी जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।

क्या टीबी की पहचान भी संभव होगी?

फिलहाल इस Swasa App के जरिए टीबी की जांच संभव नहीं है। हालांकि भविष्य में टीबी की पहचान के लिए भी इस तकनीक को विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो टीबी की पहचान के क्षेत्र में भी यह एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

 

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