छोटे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में नींद की होती है अहम भूमिका

Sandesh Wahak Digital Desk: छोटे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए नींद (Sleep) बेहद जरूरी होती है। नींद के दौरान बच्चे का दिमाग तेजी से विकसित होता है और शरीर को दिनभर की थकान से राहत मिलती है। यदि बच्चे को पर्याप्त नींद नहीं मिलती तो वह चिड़चिड़ा, बेचैन और अधिक रोने वाला हो सकता है। कम नींद का असर उसकी फोकस पावर, सीखने की क्षमता और व्यवहार पर भी पड़ता है। कई बार माता-पिता इसे सामान्य नखरे समझ लेते हैं, जबकि यह नींद की कमी का संकेत हो सकता है।

वहीं नींद (Sleep) पूरी न होने पर बच्चों की इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ सकती है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ते हैं। इसके अलावा भूख कम लगना, बार-बार जागना और दिन में ज्यादा सुस्ती भी कम नींद से जुड़ी समस्याएं हैं। इसलिए बच्चों की नींद को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

कितने घंटे की नींद जरूरी?

जानकार मानते हैं कि तीन साल से कम उम्र के बच्चों को दिन और रात मिलाकर पर्याप्त नींद (Sleep) की जरूरत होती है। इस उम्र में नींद बच्चे के शारीरिक विकास, दिमागी बढ़त और व्यवहार को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। एक से दो वर्ष के बच्चों को आमतौर पर 11 से 14 घंटे की नींद चाहिए, जिसमें दिन में एक या दो झपकी शामिल होती है। वहीं दो से तीन वर्ष के बच्चों के लिए 10 से 13 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है, जिसमें अधिकतर एक दोपहर की झपकी होती है।

वहीं जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी दिन की झपकियां कम होने लगती हैं और रात की नींद (Sleep) ज्यादा स्थिर हो जाती है। पर्याप्त नींद मिलने से बच्चा ज्यादा सक्रिय, खुश और सीखने के लिए तैयार रहता है। नींद पूरी होने पर उसकी याददाश्त, मूड और इम्यूनिटी बेहतर रहती है। इसलिए इस उम्र में नींद की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।

कम नींद के संभावित कारण

दरअसल छोटे बच्चों में कम नींद (Sleep) के कई कारण हो सकते हैं। गलत दिनचर्या और सोने-जागने का तय समय न होना एक बड़ी वजह है। सोने से पहले मोबाइल या टीवी का इस्तेमाल भी नींद में बाधा डालता है। भूख लगना, गीला डायपर या असहज कपड़े भी बच्चे की नींद खराब कर सकते हैं।

इसके अलावा दांत निकलने के समय होने वाला दर्द, पेट की परेशानी या हल्की बीमारी भी नींद (Sleep) को प्रभावित करती है। घर का शोर, ज्यादा रोशनी या असहज वातावरण भी बच्चे को बार-बार जगा सकता है।

नींद सुधारने के उपाय

दरअसल बच्चों की नींद (Sleep) सुधारने के लिए एक सही दिनचर्या बनाना जरूरी है। रोज एक ही समय पर सुलाने और जगाने की आदत डालनी चाहिए। सोने से पहले शांत माहौल रखें और तेज रोशनी या शोर से बचें। बच्चे को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं ताकि उसे असुविधा न हो।

वहीं सोने से पहले दूध पिलाना और हल्की लोरी या कहानी सुनाना भी मददगार हो सकता है। दिन में धूप और हल्की गतिविधि से भी रात की नींद (Sleep) बेहतर होती है। यदि माता-पिता इन बातों का ध्यान रखें तो बच्चे की नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और उसका समग्र विकास बेहतर ढंग से हो सकता है।

 

Also Read: फर्जीवाड़े के आरोपों में उलझा दिग्विजय सिंह की जमीन का मामला, अब ASP और CO करेंगे जांच

Get real time updates directly on you device, subscribe now.