कब असर नहीं करती है Vaccine, जानें ये महत्वपूर्ण कारण

Sandesh wahak Digital Desk: वैक्सीन (Vaccine) शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन अगर इन्हें सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो इनका असर कम हो सकता है। इसी वजह से वैक्सीन को सुरक्षित और सही तरीके से रखना स्वास्थ्य व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वैक्सीन को बनने से लेकर मरीज को लगाने तक एक निश्चित तापमान में रखना जरूरी होता है। इस पूरी प्रक्रिया को कोल्ड चेन कहा जाता है। इसका मतलब है कि वैक्सीन को तय तापमान में लगातार सुरक्षित रखा जाए ताकि उसकी गुणवत्ता और प्रभाव बना रहे। अगर इस प्रक्रिया में कहीं भी लापरवाही हो जाए तो वैक्सीन की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

विशेष स्टोरेज सिस्टम का उपयोग

दरअसल वैक्सीन (Vaccine) को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों और टीकाकरण केंद्रों में विशेष रेफ्रिजरेटर और तापमान मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से तापमान की जांच करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वैक्सीन सुरक्षित बनी रहे। सही तरीके से रखी गई वैक्सीन ही शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में प्रभावी होती है। इसलिए टीकाकरण की पूरी प्रक्रिया में स्टोरेज और निगरानी का विशेष महत्व होता है।

तापमान में बदलाव से प्रभावित हो सकती है Vaccine

असल में अगर वैक्सीन (Vaccine) को सही तापमान पर नहीं रखा जाता तो उसकी गुणवत्ता और प्रभाव पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन में मौजूद एक्टिव तत्व तापमान में बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। बहुत अधिक गर्मी या अत्यधिक ठंड इन तत्वों की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती है। इसी कारण अधिकांश वैक्सीन को 2°C से 8°C के बीच ठंडे वातावरण में रखना जरूरी होता है। इस तापमान को बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। अगर वैक्सीन लंबे समय तक इस निर्धारित सीमा से बाहर रहती है तो वह शरीर में सही इम्यून प्रतिक्रिया बनाने में सक्षम नहीं रह सकती।

फ्रीज होने से भी घट सकती है क्षमता

अक्सर यह समझा जाता है कि वैक्सीन (Vaccine) को ज्यादा ठंडा रखना सुरक्षित होता है, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता। कुछ वैक्सीन को केवल ठंडे तापमान में रखना जरूरी होता है, लेकिन उन्हें फ्रीज कर देना नुकसानदायक हो सकता है। फ्रीज होने की स्थिति में वैक्सीन के अंदर मौजूद कुछ तत्व खराब हो सकते हैं और उसकी संरचना बदल सकती है। इससे वैक्सीन की क्षमता स्थायी रूप से कम हो सकती है। यही कारण है कि टीकाकरण केंद्रों पर तापमान को बहुत सावधानी से नियंत्रित किया जाता है ताकि वैक्सीन न अधिक गर्म हो और न ही फ्रीज हो।

नियमित निगरानी से बनी रहती है गुणवत्ता

दरअसल वैक्सीन (Vaccine) की सुरक्षा बनाए रखने के लिए तापमान की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। इसके लिए विशेष थर्मामीटर और डिजिटल मॉनिटरिंग उपकरणों का उपयोग किया जाता है। कई स्थानों पर वैक्सीन वायल मॉनिटर भी लगाए जाते हैं जो तापमान के प्रभाव को पहचानने में मदद करते हैं। यदि बिजली चली जाए तो भी वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। सही स्टोरेज और लगातार निगरानी के माध्यम से ही वैक्सीन की गुणवत्ता और उसके प्रभाव को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

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