आंखों के लिए कितना खतरनाक है Glaucoma, जानें लक्षण और बचाव

Sandesh Wahak Digital Desk: ग्लूकोमा (Glaucoma) आंखों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी मानी जाती है, जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती है। इस बीमारी में आंखों के अंदर दबाव बढ़ने लगता है, जिससे आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। ऑप्टिक नर्व वह नस होती है जो आंखों से मिलने वाले संकेतों को दिमाग तक पहुंचाती है। जब इस नस को नुकसान पहुंचता है तो व्यक्ति की देखने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। कई बार यह समस्या शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट परेशानी के भी बढ़ती रहती है, इसलिए समय पर इसकी पहचान करना जरूरी हो जाता है।

Glaucoma के कारण

दरअसल ग्लूकोमा (Glaucoma) का खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र इसके प्रमुख कारणों में से एक मानी जाती है। इसके अलावा अगर परिवार में पहले किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा रहा हो तो अन्य सदस्यों में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं। लंबे समय तक कुछ दवाओं का इस्तेमाल करना, आंखों में चोट लगना या आंखों के अंदर दबाव का बहुत ज्यादा बढ़ जाना भी ग्लूकोमा का कारण बन सकता है। इसलिए जागरूकता और समय पर जांच इस बीमारी से बचाव में अहम भूमिका निभाती है।

कैसे दिखाई देते हैं लक्षण?

दरअसल ग्लूकोमा के लक्षण शुरुआत में हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं। यही कारण है कि कई लोगों को इस बीमारी का पता देर से चलता है। धीरे-धीरे व्यक्ति की नजर कमजोर होने लगती है और देखने का दायरा कम हो सकता है। कई मामलों में लोगों को किनारों से साफ दिखाई नहीं देता, जिसे टनल विजन कहा जाता है।

इसके अलावा कुछ लोगों को आंखों में दर्द, सिरदर्द या आंखों में भारीपन महसूस हो सकता है। तेज रोशनी देखने पर आंखों के सामने रंगीन घेरे दिखाई देना भी इसका एक संकेत हो सकता है। आंखों का लाल होना, धुंधला दिखाई देना या अचानक नजर कम होना भी ग्लूकोमा के लक्षणों में शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।

कितनी खतरनाक है यह बीमारी?

दरअसल ग्लूकोमा (Glaucoma) को आंखों की गंभीर बीमारी माना जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है। अगर समय पर इसका पता नहीं चलता और इलाज नहीं कराया जाता तो व्यक्ति की नजर काफी हद तक कमजोर हो सकती है।

कई मामलों में यह बीमारी अंधापन तक का कारण बन सकती है। इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब तक समस्या स्पष्ट होती है, तब तक आंखों की नस को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। इसलिए नियमित आंखों की जांच कराना बेहद जरूरी माना जाता है।

बचाव और इलाज के तरीके

दरअसल ग्लूकोमा (Glaucoma) से बचाव के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच कराना सबसे जरूरी माना जाता है। खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद समय-समय पर आंखों का चेकअप करवाना चाहिए। अगर परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी रही है तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

वहीं डॉक्टर की सलाह के अनुसार आई ड्रॉप्स, दवाइयों या जरूरत पड़ने पर सर्जरी के जरिए इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रण में रखना भी आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। नियमित जांच और सही समय पर इलाज से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

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