मिडिल ईस्ट तनाव के बीच Inter-Ministerial Group का गठन, राजनाथ सिंह करेंगे अध्यक्षता
Sandesh Wahak Digital Desk: मिडिल-ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच भारत सरकार ने स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित अन्य मंत्री शामिल हैं। सरकार की ओर से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में राहत
सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बदलाव भी किया है। अब पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। इसके साथ ही डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 21.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी टैक्स में बदलाव करते हुए 50 रुपये प्रति लीटर की नई एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है, हालांकि छूटों के बाद प्रभावी ड्यूटी 29.5 रुपये प्रति लीटर रहेगी, जिससे एविएशन सेक्टर पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की वर्चुअल बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक करेंगे। इस बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे जहां चुनाव होने वाले हैं। बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा करना है। यह बैठक वर्चुअल माध्यम से होगी, जैसा कि कोविड महामारी के दौरान किया जाता था। यह पहली बार होगा जब प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर मुख्यमंत्रियों के साथ इस तरह की बैठक करेंगे।
मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद ईरान ने अपने खाड़ी पड़ोसी देशों और इजराइल को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।
गैर-घरेलू LPG कोटा बढ़ाकर 70 प्रतिशत
औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देशों के तहत गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन में बढ़ोतरी करते हुए राज्यों के लिए इसका कुल कोटा 70 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से उद्योगों को ऊर्जा आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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