Balrampur News: जिला मेमोरियल अस्पताल में मासूम की मौत, परिजनों ने डॉक्टर्स पर लगाए गंभीर आरोप
Balrampur News: जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर दागदार हुई है। जिला मेमोरियल अस्पताल में तैनात चिकित्सकों की कथित संवेदनहीनता और लापरवाही के चलते एक 13 माह की मासूम बच्ची ‘प्रियांशी’ की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया और आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में कोताही बरतने का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मासूम की मां का रो-रोकर बुरा हाल है, वह रह-रहकर बेहोश हो रही हैं।
मामले का घटनाक्रम: बुखार से शुरू हुआ सफर, मौत पर थमा
मिली जानकारी के अनुसार, नगर कोतवाली क्षेत्र के निवासी संतोष शुक्ला अपनी 13 माह की बेटी प्रियांशी को बीते 1 अप्रैल को तेज बुखार की शिकायत होने पर जिला मेमोरियल अस्पताल लेकर आए थे। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने बच्ची की स्थिति देखते हुए उसे वार्ड में भर्ती कर लिया और प्राथमिक उपचार शुरू किया। परिजनों को उम्मीद थी कि सरकारी अस्पताल में उनकी लाडली को नया जीवन मिलेगा, लेकिन व्यवस्था की सुस्ती भारी पड़ गई।
पिता का आरोप: “24 घंटे तक झांकने नहीं आया कोई डॉक्टर”
मृतका के पिता संतोष शुक्ला ने रुंधे गले से बताया कि 1 अप्रैल को भर्ती करने के बाद अगले पूरे दिन (2 अप्रैल) को कोई भी वरिष्ठ चिकित्सक उनकी बेटी को देखने नहीं पहुँचा। उन्होंने आरोप लगाया, “मेरी बेटी की हालत बिगड़ रही थी, हम बार-बार मिन्नतें करते रहे लेकिन स्टाफ केवल मौसम बदलाव का बहाना बनाता रहा। डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में नर्सों के भरोसे इलाज चलता रहा।”
जब तक आई ऑक्सीजन, तब तक बुझ चुका था चिराग
परिजनों के अनुसार, तीसरे दिन सुबह जब बच्ची की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, तब जाकर डॉक्टर वार्ड में पहुँचे। आनन-फानन में बच्ची को ऑक्सीजन लगाने और अन्य जीवन रक्षक प्रक्रियाएं शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक मासूम प्रियांशी दम तोड़ चुकी थी। पिता का कहना है कि यदि समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर ने निगरानी की होती, तो आज उनकी बेटी उनके साथ होती।
पुलिस बल तैनात, जांच शुरू
अस्पताल में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने नगर कोतवाली पुलिस को मौके पर बुलाया। पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पीड़ित पिता ने डॉक्टरों की लापरवाही के विरुद्ध लिखित तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मेडिकल पैनल की राय के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और मुख्यमंत्री के ‘बेहतर स्वास्थ्य सेवा’ के दावों पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि क्या मासूम की मौत के जिम्मेदारों पर कोई कठोर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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