यूपी चुनाव से पहले निषाद वोट बैंक को साधने में जुटी बीजेपी-सपा, 140 सीटों पर बिगाड़ सकते हैं खेल

Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा के अगले साल होने वाले चुनावों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक दल निषादों का वोट बैंक साधने की कवायद में लग गए हैं। भाजपा हो या सपा, सभी इस मजबूत समुदाय को अपने पाले में करने के लिए दांव चल रहे हैं।

हाल ही में भाजपा ने निषाद समाज की पूर्व सांसद साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया है। वहीं, सपा ने पूर्व सांसद फूलन देवी की बहन रुक्मणी निषाद को अपनी महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजनीतिक जानकार इन दोनों नियुक्तियों को निषाद समाज को साधने की रणनीति मान रहे हैं।

क्यों हैं इतने खास निषाद

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, निषाद समाज अपने मजबूत वोट बैंक के जरिए बड़े राजनीतिक दलों का कई सीटों पर खेल बिगाड़ सकता है। ऐसे में कोई भी पार्टी कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती।

निषाद समाज की सबसे बड़ी मांग उनके समाज की अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल कराने की है। जो पार्टी इस दिशा में कुछ करने की बात करती है, समाज का वोट उसी पार्टी को जाता रहा है।

140 सीटों पर निषादों का दबदबा

हालांकि यूपी के हर क्षेत्र में निषादों की ठीक-ठाक आबादी है। गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, बलिया, संत कबीर नगर, मिर्जापुर, भदोही, प्रयागराज, वाराणसी, जौनपुर, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, सहारनपुर और लखीमपुर जैसे जिलों में उनकी बाहुल्य आबादी है।

राजनीतिक गलियारों में यह आकलन लगाया जाता है कि निषाद समाज यूपी की करीब 140 विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम बदलने की ताकत रखता है। इन सीटों पर 60 हजार से लेकर 1.20 लाख तक निषादों का वोट है। इतना ही नहीं, 23 लोकसभा सीटों पर निषाद समाज की आबादी करीब एक से तीन लाख तक है। निषाद समाज को कई नामों से भी जाना जाता है- बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, बाथम, चौधरी, तुरैहा, धीमर, रायकवार आदि।

निषाद पार्टी का राजनीतिक कद

यूपी में निषादों के वोट बैंक पर डॉ. संजय निषाद की अगुआई वाली निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) की अच्छी पैठ मानी जाती है।

2022 के विधानसभा चुनावों में निषाद पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर 16 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।

10 सीटों पर निषाद पार्टी के सिंबल पर– 6 जीते

6 सीटों पर भाजपा के सिंबल पर– 5 जीते

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी मुखिया डॉ. संजय निषाद के पुत्र चुनाव हार गए। उन्हें गठबंधन के तहत भाजपा के सिंबल पर उतारा गया था।

बिहार में भी नजर

यूपी की तरह बिहार में भी निषादों की राजनीति सक्रिय है। डॉ. संजय निषाद को ‘पॉलिटिकल गॉडफादर ऑफ फिशर मैन’ कहा जाता है। वहीं, बिहार में वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी इस समुदाय के बड़े नेता हैं, जिन्हें ‘सन ऑफ मल्लाह’ बोला जाता है। मुकेश सहनी पहले भी यूपी के चुनावों में उतर चुके हैं, लेकिन निषाद पार्टी के आगे उन्हें निषादों की खास तवज्जो नहीं मिल पाई।

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