अखिलेश यादव ने भाजपा को बताया ‘शिक्षा विरोधी’, रविदास मेहरोत्रा का नगर निगम पर बड़ा हल्लाबोल
Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिक्षा विभाग की बदहाली और अयोध्या के मास्टर प्लान में हो रहे बदलावों को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर प्रदेश की युवा पीढ़ी को वैज्ञानिक सोच से दूर कर रूढ़िवादिता और अंधविश्वास की ओर धकेल रही है। दूसरी ओर, लखनऊ में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने नगर निगम का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

“शिक्षित लोग सवाल पूछते हैं, इसलिए भाजपा को शिक्षा से नफरत”
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देना चाहती क्योंकि शिक्षित लोग सरकार की गलत नीतियों पर सवाल उठाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद हजारों प्राइमरी स्कूल बंद हो गए और बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। सपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि सपा सरकार ने बच्चों को ‘हॉट कुक्ड मील’, फल, दूध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी थी। लखनऊ के चकगंजरिया में बना ‘संस्कृति स्कूल’ भाजपा सरकार ने आज तक शुरू नहीं किया। सपा अध्यक्ष ने कहा कि हमने शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाया था, लेकिन भाजपा ने उन्हें फिर से मामूली मानदेय पर धकेल दिया। आज चुनावी साल में मानदेय थोड़ा बढ़ाकर सरकार ‘ढिंढोरा’ पीट रही है, जबकि यह सपा सरकार के वेतन का आधा भी नहीं है।

अयोध्या मास्टर प्लान में ‘भ्रष्टाचार’ का खेल
अयोध्या के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि वहां का मास्टर प्लान बार-बार बदला नहीं, बल्कि “महाभ्रष्ट” लोगों द्वारा बदलवाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसा कि नए लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए लखनऊ में बैठकर सिफारिशें आती हैं, जिससे पुराने मास्टर प्लान निरस्त कर दिए जाते हैं। उन्होंने अपील की कि भाजपा कम से कम अयोध्या को तो अपने भ्रष्टाचार से मुक्त रखे।

लखनऊ नगर निगम का घेराव: रविदास मेहरोत्रा की चेतावनी
मध्य विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया। विधायक ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन सड़कें टूटी हैं, पानी की किल्लत है और सफाई व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने अपर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों में समस्याओं का समाधान शुरू नहीं हुआ, तो सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन होगा।

