Muzaffarnagar News: अधिवक्ता समीर हत्याकांड के 3 दोषियों को फांसी, जज ने फैसले में लिखी मार्मिक कविता
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से कानून और व्यवस्था की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। करीब 7 साल पहले हुए युवा अधिवक्ता समीर सैफी के अपहरण और सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने सोमवार को अपना अंतिम फैसला सुनाया। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने इस जघन्य अपराध के लिए तीन मुख्य दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।
चेंबर उद्घाटन के दिन ही बुझ गया घर का चिराग
यह मामला भावुक और दुखद है क्योंकि 15 अक्टूबर 2019 को समीर सैफी ने कचहरी में अपने नए चेंबर का उद्घाटन किया था। उसी शाम 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में आरोपियों ने उनका अपहरण कर लिया।
मुख्य आरोपी सिंगोल अल्वी ने अपने साथियों के साथ मिलकर समीर का गला घोंटा और शव को सीकरी फार्म हाउस की मिट्टी में दबा दिया। लापता होने के चार दिन बाद 19 अक्टूबर को भोपा क्षेत्र से समीर का शव बरामद हुआ था।
किसे, क्या मिली सजा?
अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कड़ी सजा सुनाई। न्यायालय ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज तीनों को अपहरण, हत्या, साजिश और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई गई। साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जबकि चौथे आरोपी दिनेश को साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया गया और 7 साल की कैद की सजा सुनाई गई।
अदालती फैसले में कविता का जिक्र
सुनवाई के दौरान जज रवि कुमार दिवाकर ने इस मामले की संवेदनशीलता और समाज पर इसके प्रभाव को देखते हुए अपने फैसले में एक मार्मिक कविता भी लिखी। अदालत ने माना कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरलतम से विरल) श्रेणी में आता है, जहाँ एक युवा वकील की उसके करियर के पहले ही दिन बेरहमी से हत्या कर दी गई।
घटनाक्रम: एक नजर में
15 अक्टूबर 2019: चेंबर उद्घाटन के बाद समीर लापता हुए।
19 अक्टूबर 2019: भोपा के सीकरी से शव मिला।
04 अप्रैल 2026: आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ।
06 अप्रैल 2026: फांसी की सजा का एलान।
फैसले में लिखी गई यह कविता….
”कचहरी की सीढ़ियों पर,
आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है,
जहां दलीलों की गूंज थी कल,
वहां खामोशी डोल रही है,
काला कोट जो ढाल बना था,
सच की हर एक लड़ाई में,
वो गिर पड़ा आज जमीन पर,
झूठ की गहरी साजिश में,
कल तक जो कानून था जिंदा,
हर जुर्म को आईना दिखाता था,
आज उसी के रखवाले को,
किसी ने बेरहमी से सुला डाला,
पर ये खून बेकार नहीं जायेगा,”
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