UP Politics: संजय निषाद बोले- मर्यादा में रहें राजभर, NDA के भीतर सीट शेयरिंग पर संग्राम तेज
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन पूर्वांचल की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। योगी सरकार के मंत्री और सुभासपा (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत जहूराबाद सीट छोड़ने का एलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजभर अब आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से किस्मत आजमाना चाहते हैं, जिस पर सहयोगी दल निषाद पार्टी का पहले से प्रभाव रहा है।
सहयोगियों में ‘आर-पार’: संजय निषाद बनाम राजभर
राजभर की नजर न केवल अतरौलिया पर है, बल्कि उन्होंने जौनपुर की शाहगंज सीट पर भी दावा ठोक दिया है, जहां से निषाद पार्टी के रमेश सिंह वर्तमान विधायक हैं। एक ओर जहां निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा, “गठबंधन में रहकर ऐसी एकतरफा घोषणाएं करना गलत है। राजभर को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए।” तो वहीं दूसरी ओर राजभर ने दावा किया है उनकी बातचीत हो चुकी है, जबकि संजय निषाद ने इसे सिरे से नकार दिया है।
बेटे के लिए भी ‘सेफ पैसेज’ की तलाश
राजभर केवल अपनी ही नहीं, बल्कि अपने बेटे अरविंद राजभर की सीट भी बदलना चाहते हैं। शिवपुर (वाराणसी) और घोसी (लोकसभा) में हार का स्वाद चख चुके अरविंद राजभर के लिए अब आजमगढ़ की दीदारगंज सीट चुनी गई है। यह सीट राजभर बहुल मानी जाती है और शिवपुर सीट भाजपा छोड़ने को तैयार नहीं है।
आखिर जहूराबाद क्यों छोड़ रहे हैं राजभर? 4 बड़े कारण
1. अंसारी परिवार का बढ़ता वर्चस्व
2022 के चुनाव में राजभर सपा के साथ थे और उन्हें अंसारी परिवार का खुला समर्थन मिला था, जिससे मुस्लिम और यादव वोट उनके पक्ष में गिरे। अब समीकरण बदल चुके हैं। राजभर भाजपा के साथ हैं और अंसारी परिवार सपा के साथ। गाजीपुर में अंसारी परिवार के प्रभाव के आगे राजभर को अपनी राह कठिन लग रही है।
2. सवर्ण वोटों की नाराजगी
अपने बयानों के लिए मशहूर राजभर अक्सर सवर्ण समाज (ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार) के निशाने पर रहते हैं। घोसी लोकसभा चुनाव में सवर्णों की बेरुखी ने अरविंद राजभर को हरवा दिया था। यही डर अब ओम प्रकाश राजभर को सता रहा है कि जहूराबाद में सवर्ण उनके खिलाफ जा सकते हैं।
3. ‘बाहरी’ का ठप्पा और सत्ता विरोधी लहर
राजभर मूल रूप से बलिया के हैं और वाराणसी में रहते हैं। जहूराबाद में पिछले 10 साल से विधायक रहने के कारण स्थानीय जनता में उनके प्रति नाराजगी (Anti-incumbency) है। जनता के बीच ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ का मुद्दा उनके लिए सिरदर्द बन गया है।
4. ‘सेफ सीट’ की मजबूरी
बदले हुए सियासी माहौल में राजभर को लगता है कि आजमगढ़ की सीटें उनके जातीय समीकरण के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित हैं। अतरौलिया में निषाद पार्टी और दीदारगंज में भाजपा की दावेदारी के बावजूद वे यहाँ अपनी पैठ जमाना चाहते हैं।

