हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार चुने गए राज्यसभा के उपसभापति
Sandesh Wahak Digital Desk: पत्रकारिता जगत से राजनीति में आए हरिवंश नारायण सिंह ने शुक्रवार को भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया। राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए उन्हें लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुन लिया गया है। विपक्षी दलों द्वारा कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण सुबह 11 बजे उनके निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की गई।
हरिवंश की यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। 9 अप्रैल, 2026 को जेडीयू (JDU) कोटे से उनका पिछला कार्यकाल समाप्त हुआ था। जिसके बाद 10 अप्रैल, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मनोनीत (Nominated) सदस्य को सदन के उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निर्वाचन की प्रक्रिया और एनडीए का प्रस्ताव
सदन के नेता जेपी नड्डा ने हरिवंश के नाम का पहला प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन सांसद एस. फांगनोन कोन्याक ने किया। कुल मिलाकर सचिवालय को उनके पक्ष में 5 प्रस्ताव मिले। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने लोकसभा उपाध्यक्ष का पद खाली होने का मुद्दा उठाते हुए चुनाव का बहिष्कार किया, लेकिन अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा।
सदन का भरोसा और अनुभव का लाभ: पीएम मोदी
सदन में हरिवंश को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके अनुभव और कार्यशैली की सराहना की। पीएम ने कहा, लगातार तीसरी बार चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि सदन का आप पर कितना गहरा भरोसा है। आपके नेतृत्व में सदन की ताकत और भी असरदार हुई है। आप न केवल कार्यवाही का संचालन करते हैं, बल्कि अपने अनुभवों से सदन को समृद्ध भी करते हैं।
हरिवंश नारायण सिंह मूल रूप से पत्रकारिता जगत से आए हैं और उनकी निष्पक्ष कार्यशैली के कारण ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर उनकी सराहना होती रही है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सीट खाली होने के बाद उनकी उच्च सदन में वापसी हुई है।
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