कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में मां का कटा हाथ लेकर इंसाफ मांगने पहुंचा ITBP का जवान

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर कमिश्नरेट कार्यालय में मुगलवार को उस वक्त स्थिति बेहद भावुक हो गई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का एक जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक डिब्बे में लेकर सीधे बड़े पुलिस अधिकारियों के दफ्तर पहुंच गया। कार्यालय में मौजूद पुलिसकर्मी और अपनी शिकायतें लेकर आए अन्य फरियादी बॉक्स के अंदर इंसान का कटा हाथ देखकर हैरान रह गए। जवान का आरोप है कि शहर के एक नामचीन निजी अस्पताल की घोर चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उसकी मां का हाथ काटना पड़ा। जब वह इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए स्थानीय थानों के चक्कर काट रहा था, तो उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

मूल रूप से फतेहपुर जिले के खागा हाथगाम के रहने वाले विकास सिंह आईटीबीपी में जवान हैं और वर्तमान में वह महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रोते हुए विकास ने पुलिस अधिकारियों को आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनकी मां लंबे समय से सांस की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। 13 मई, 2026 को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद विकास उन्हें एम्बुलेंस से लेकर अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में भारी जाम होने और मां की गंभीर हालत को देखते हुए वे उन्हें आनन-फानन में टाटमिल चौराहे के पास स्थित कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने महिला को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया और इलाज के लिए उनके हाथ में कैनुला (वीगो) लगाया, जिससे मरीज की हालत थोड़ी स्थिर हुई।

गलत तरीके से वीगो लगाने का आरोप

विकास सिंह के अनुसार, अगले दिन 14 मई को वे अपनी मां को बेहतर और उच्च स्तरीय इलाज के लिए पारस हॉस्पिटल ले गए। वहां के डॉक्टरों ने सांस की तकलीफ को तो काबू में कर लिया, लेकिन मां के उस हाथ में तेज दर्द, भयंकर सूजन और कालापन बढ़ने लगा जहां पिछले अस्पताल में वीगो लगाया गया था। पारस अस्पताल के डॉक्टरों ने जब हाथ की सघन जांच की, तो उन्होंने बताया कि गलत तरीके से वीगो लगाए जाने के कारण नसें डैमेज हो चुकी हैं और हाथ में गैंग्रीन (जहर) फैल गया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत पूरा हाथ काटकर अलग नहीं किया गया, तो यह जानलेवा इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल जाएगा और उनकी जान को खतरा हो सकता है। आखिरकार, मां की जिंदगी बचाने के लिए विवश होकर डॉक्टरों को 17 मई को उनका पूरा हाथ काटना पड़ा।

बटालियन से परमिशन ले सीधे पहुंचे कमिश्नर दफ्तर

पीड़ित जवान का कहना है कि इस घटना के बाद वह न्याय के लिए भटकने को मजबूर हो गया। उसने अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही के खिलाफ स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काटे, लेकिन कहीं भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हर तरफ से निराश होने के बाद विकास ने अपनी आईटीबीपी बटालियन के आला अफसरों को पूरी घटना से अवगत कराया और वहां से विशेष अनुमति (परमिशन) लेकर सीधे कानपुर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय का रुख किया।

कमिश्नरेट दफ्तर में जवान की शिकायत और बॉक्स में कटा हाथ देखकर अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। स्टाफ अफसर अमरनाथ यादव ने बताया कि पीड़ित जवान की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया है। मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच के लिए कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा गया है। सीएमओ ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तीन वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष कमेटी (मेडिकल बोर्ड) का गठन कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट सामने आते ही दोषी अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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