भारत-नेपाल कॉरिडोर सड़क परियोजना पर विवाद, सिद्धार्थनगर में सर्वे के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण
Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाली प्रस्तावित कॉरिडोर सड़क परियोजना को लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। नगर पंचायत कपिलवस्तु के बुद्धद्वार बर्डपुर तिराहे से लेकर नेपाल सीमा (कपिलवस्तु अलीगढ़वा) तक बनने वाली इस सड़क के सर्वे को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई हैं। बर्डपुर व्यापार संघ के अध्यक्ष राजकमल जायसवाल की अगुवाई में दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जा रहे मौजूदा सर्वे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
इस कॉरिडोर परियोजना की जद में बर्डपुर तिराहा बुद्ध द्वार, चैनपुर चौराहा, धर्मपुर, बिहरा, पचगवा और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सहित अलीगढ़वा मार्ग के दोनों किनारों पर बसे सैकड़ों परिवार आ रहे हैं, जिनके आशियाने और दुकानों पर अब संकट मंडरा रहा है।

एकतरफा पैमाइश से बाजार और दुकानें उजड़ने का खतरा
‘संदेशवाहक’ से विशेष बातचीत के दौरान व्यापार संघ अध्यक्ष राजकमल जायसवाल और स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नियमानुसार सड़क चौड़ीकरण के दौरान सेंटर लाइन (मध्य बिंदु) से दोनों तरफ बराबर दूरी पर जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, वर्तमान में लगभग 6 किलोमीटर लंबे पैच में नियमों को ताक पर रखकर केवल एक ही दिशा में 21 मीटर तक की निशानदेही की जा रही है। इस दोषपूर्ण सर्वे के कारण वर्षों पुराने स्थापित बाजार, व्यावसायिक दुकानें और आवासीय इमारतें पूरी तरह जमींदोज होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

सिंचाई विभाग की अनुपयोगी नहर बन सकती है समाधान
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को एक व्यावहारिक विकल्प सुझाते हुए बताया कि प्रस्तावित मार्ग के दूसरी तरफ सिंचाई विभाग की एक बेहद पुरानी और बेकार पड़ी नहर मौजूद है। अगर प्रशासन और पीडब्ल्यूडी इस सरकारी और अनुपयोगी भूमि का इस्तेमाल सड़क निर्माण के लिए करते हैं, तो सैकड़ों गरीब परिवारों को बेघर होने से आसानी से बचाया जा सकता है। इसके अलावा, ज्ञापन में इस बात पर भी नाराजगी जताई गई कि इतनी घनी आबादी और मुख्य बाजारों को सुरक्षित रखने के लिए विभाग ने किसी बाईपास मार्ग की रूपरेखा तैयार नहीं की है, जिससे स्थानीय व्यापारियों के सामने सीधे तौर पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
जनता ने साफ किया है कि वे देश के विकास या अंतरराष्ट्रीय कॉरिडोर के निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि विकास की कीमत पर जनहित की अनदेखी न हो। ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्तमान एकतरफा सर्वे पर तुरंत रोक लगाई जाए और पीडब्ल्यूडी, राजस्व व सिंचाई विभाग की एक संयुक्त टीम बनाकर मौके का दोबारा निरीक्षण कराया जाए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन जनता की इस जायज मांग पर क्या रुख अपनाता है।
रिपोर्ट- जाकिर खान
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