‘फर्जीवाड़े का विरोध किया, इसलिए हटाया गया’, Ram Mandir से जुड़े पूर्व इंजीनियर का बड़ा दावा
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में नया मोड़ आ गया है। मंदिर निर्माण के शुरुआती चरण में इंजीनियरिंग सहयोग से जुड़े रहे रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने निर्माण कार्य में फर्जीवाड़े और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाए तो वह एसआईटी के सामने विस्तृत बयान देने को तैयार हैं।
दीनानाथ वर्मा का दावा है कि Ram Mandir की नींव की खुदाई और मिट्टी हटाने के कार्य के दौरान उन्हें वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी मिली थी। उनके अनुसार, मजदूरों को वर्कचार्ज पर दिखाकर कथित तौर पर फर्जी बिल बनाए जा रहे थे, जिससे एक ही काम के लिए दोहरा भुगतान होने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को जानकारी दी थी, जिसके बाद कुछ भुगतान रोक दिए गए, लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि Ram Mandir में एल्यूमीनियम कार्य के बिल तय लागत से काफी अधिक थे। उनका दावा है कि ठेकेदार से पूछताछ के दौरान उन्हें कथित रूप से कमीशन दिए जाने की बात बताई गई। हालांकि ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि जिस समय की बात कही जा रही है, उस समय ट्रस्ट का खाता सक्रिय ही नहीं था।
रिटायर्ड इंजीनियर ने टिन्नू यादव और उनके सहयोगियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में गड़बड़ियों पर सवाल उठाने के बाद उन्हें इंजीनियरिंग जिम्मेदारी से हटाकर अस्थायी मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़ा काम सौंप दिया गया। बाद में हालात ऐसे बने कि उन्हें अयोध्या छोड़कर प्रयागराज लौटना पड़ा।
उधर, Ram Mandir प्रकरण में SIT की जांच लगातार जारी है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र समेत कई लोगों से पूछताछ की है। दानपात्रों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य व्यवस्थाओं की भी वीडियोग्राफी कराई गई है। बताया जा रहा है कि एसआईटी जल्द ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर सकती है।
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